पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में उतरे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से भड़की कांग्रेस
नई दिल्ली में छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर दिख रहा है। परीक्षा के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हो रहे हैं। मेहनत, समय और सपने दांव पर लग रहे हैं। इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत का अब तक का “सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री” बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर उतरे लड़के और लड़कियां अपराधी नहीं हैं। वे अपने अधिकार मांग रहे हैं।
हमने उनके वीडियो संदेश में एक बेहद आक्रामक राजनीतिक रुख देखा। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस कुछ हफ्तों से नहीं, बल्कि कई वर्षों से पेपर लीक का सवाल उठा रही है। उनके मुताबिक छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं।
प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करना चाहते थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आंसू गैस चली। लाठियां भी उठीं। कई छात्रों को हिरासत में लेने की खबर सामने आई।
राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने सवाल किया कि पेपर लीक करने वाले खुले क्यों घूम रहे हैं, जबकि जवाब मांगने वाले छात्रों को पीटा जा रहा है।
उनका संदेश साफ था। शिक्षा व्यवस्था छात्रों का सम्मान करे। परीक्षा निष्पक्ष हो। मेहनत का नतीजा किसी लीक हुए पेपर या संगठित गिरोह के हाथों बर्बाद न हो।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध मौलिक अधिकार है। सत्ता हमेशा नहीं रहती। जवाबदेही से कोई बच नहीं सकता।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश में 152 पेपर लीक के कारण करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने पर भी सवाल उठाया। ये आंकड़े कांग्रेस के दावे हैं और सरकार की ओर से इन पर तत्काल विस्तृत जवाब सामने नहीं आया।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। संसद परिसर में उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्र देश के अपने बच्चे हैं। संसद किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं है। युवाओं के सवालों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें बल प्रयोग से चुप कराया जाना चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि उसने संसद में पेपर लीक और शिक्षा नीति पर बहस की मांग लगातार उठाई है। पार्टी अब इस आंदोलन के जरिए युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
इस विरोध प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP तेजी से उभरी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने हैं। उनकी मौजूदगी ने छात्र असंतोष को राष्ट्रीय बहस में बदल दिया है।
हमारे लिए इस पूरे विवाद का केंद्र राजनीतिक बयानबाजी नहीं है। असली सवाल परीक्षा व्यवस्था का भरोसा है।
एक छात्र महीनों तक पढ़ता है। परिवार पैसा खर्च करता है। परीक्षा से भविष्य जुड़ा होता है। पेपर लीक उस पूरी मेहनत को कुछ मिनटों में राख कर देता है।
दिल्ली का प्रदर्शन इसी टूटते भरोसे की आवाज है। अब नजर नरेंद्र मोदी सरकार पर है। क्या सरकार छात्रों से सीधी बात करेगी? क्या पेपर लीक के आरोपियों पर तेज कार्रवाई होगी? या सड़कों पर टकराव और गहरा होगा?
