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परिसीमन विधेयक पर तीन बदलावों के साथ समर्थन पर विचार कर सकती है डीएमके

द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर समर्थन की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, डीएमके चाहती है कि विधेयक में सीटों की मौजूदा व्यवस्था को 25 वर्ष तक बनाए रखने सहित तीन प्रमुख बदलाव किए जाएं।

डीएमके ने रखीं तीन प्रमुख शर्तें

नरेंद्र मोदी सरकार नए परिसीमन के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने की संभावनाएं तलाश रही है। इस बीच डीएमके के सूत्रों का कहना है कि पार्टी संशोधित विधेयक पर समर्थन देने पर विचार कर सकती है।

डीएमके की पहली मांग है कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या पर लागू संवैधानिक रोक को अगले 25 वर्ष तक बढ़ाया जाए। मौजूदा व्यवस्था आगामी जनगणना पूरी होने के बाद समाप्त होनी है। यह जनगणना 2027 तक पूरी होने की संभावना जताई गई है।

दूसरी मांग सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में परिसीमन से जुड़ा विधायी पैकेज संसद में पेश किए जाने के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसी बढ़ोतरी का मौखिक आश्वासन दिया था।

पार्टी की तीसरी शर्त है कि विधेयक के साथ एक स्पष्ट अनुसूची जोड़ी जाए, जिसमें बताया जाए कि बदलाव के बाद प्रत्येक राज्य को लोकसभा की कितनी सीटें मिलेंगी।

सरकार की ओर से अभी कोई संपर्क नहीं

डीएमके के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक पार्टी से न तो औपचारिक और न ही अनौपचारिक संपर्क किया है। पार्टी का कहना है कि विधेयक के अंतिम स्वरूप और उसके प्रावधानों को देखने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

इस कारण डीएमके के संभावित समर्थन को अभी अंतिम राजनीतिक निर्णय नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी केवल उन शर्तों की ओर संकेत करती है, जिनके पूरा होने पर पार्टी प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।

विपक्ष से बातचीत बढ़ाने की कोशिश

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सरकार संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के उद्देश्य से विपक्षी दलों से संपर्क बढ़ा रही है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बातचीत की। रिजिजू के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच कुछ विशेष मुद्दों और अन्य संसदीय विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के साथ लगातार संवाद की उम्मीद भी जताई।

इससे एक दिन पहले रिजिजू ने संसद स्थित राहुल गांधी के कार्यालय में उनसे मुलाकात की थी। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने परिसीमन के लिए संवैधानिक संशोधन लाने के विरोध को दोहराया।

लोकसभा में बहुमत का गणित

संवैधानिक संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी।

रिपोर्ट में मौजूदा 540 सदस्यीय लोकसभा के आधार पर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 बताया गया है। डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन मिलने पर सरकार के पक्ष में संख्या 346 तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में भी सरकार को 14 अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी, हालांकि मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने या मतदान से दूर रहने वाले सदस्यों के कारण आवश्यक आंकड़ा बदल सकता है।

राज्यसभा में सभी 244 सदस्य मतदान में शामिल होते हैं तो विधेयक पारित कराने के लिए 164 मत चाहिए होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास फिलहाल 158 सांसद हैं।

लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव

अमित शाह पहले कह चुके हैं कि पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित होने के बाद सरकार लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने वाला संवैधानिक संशोधन विधेयक दोबारा ला सकती है।

सरकार का कहना है कि नए परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल के बाद सरकार को तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों का समर्थन मिला है, जो अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा हैं। उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में गए छह सांसदों का समर्थन भी सरकार के पक्ष में बताया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इन सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक करने वाले हैं।

कांग्रेस ने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की तैयारी की

परिसीमन और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम से जुड़े संशोधन विधेयकों को अगले सप्ताह संसद में लाए जाने की संभावना के बीच कांग्रेस अपने सांसदों के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी करने की तैयारी में है। इसके तहत पार्टी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाएगा।

इस बीच छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही बाधित रही। विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की।

डीएमके ने अभी विधेयक के समर्थन की औपचारिक घोषणा नहीं की है। पार्टी का अंतिम रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार नए प्रस्ताव में सीटों की मौजूदा व्यवस्था, सभी राज्यों के लिए समान बढ़ोतरी और राज्यवार सीटों के स्पष्ट बंटवारे को किस रूप में शामिल करती है।

By Suryakant Bhosle

मेरा नाम सुर्याकांत भोसले है। मैं Bengaluru में रहता हूँ और News Trend India के लिए काम करता हूँ। मेरी खास रुचि राजनीति, समाज और विज्ञान से जुड़ी खबरों में है। मैं मुख्य रूप से इन विषयों पर रिपोर्ट और लेख लिखता हूँ। मैंने 2017 में पुणे यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में डिग्री ली थी। उसके बाद मैंने एक लोकल न्यूज चैनल में दो साल काम किया। 2019 से मैं डिजिटल मीडिया में काम कर रहा हूँ। मुझे सच्ची और असरदार खबरें लिखना पसंद है। Email: [email protected]

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