बिहार सरकार ने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने का फैसला किया है। जेल और हिरासत में बंद प्रदर्शनकारियों को भी तुरंत रिहा किया जाएगा।
राज्य के गृह विभाग ने सोमवार देर शाम आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि 26 जुलाई की शाम छह बजे से पहले हुए प्रदर्शनों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक या बदले की कार्रवाई नहीं होगी।
पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। यह बंद वामपंथी छात्र संगठनों ने बुलाया था।
हिरासत में लिए गए लोगों में 339 नाबालिग थे। पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। बाकी 355 लोगों पर अलग-अलग कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए। वे अदालतों में मुकदमों का सामना कर रहे थे।
हमने देखा कि राज्य में तनाव 22 जुलाई से बढ़ने लगा था। उस दिन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, यानी आइसा, के कार्यकर्ता जुलूस लेकर मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंच गए थे।
गिरफ्तार नेताओं में भाकपा-माले लिबरेशन के विधायक संदीप सौरव भी शामिल थे। पुलिस ने उन्हें बिहार बंद से एक दिन पहले हिरासत में लिया था।
पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को शनिवार शाम पकड़ा गया। पुलिस का आरोप था कि वह बंद लागू कराने की कोशिश कर रहे थे।
गृह विभाग ने साफ कहा है कि सभी प्राथमिकी, आपराधिक शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।
सरकार ने यह भरोसा भी दिया कि इन प्रदर्शनों से जुड़े लोगों के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह फैसला आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार से मुलाकात के कुछ घंटे बाद आया। नेहा ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था। इसमें मुकदमों की वापसी और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग रखी गई थी।
नेहा बोरा दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो बिहार में भी जंतर-मंतर जैसा बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
उन्होंने सम्राट चौधरी सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि केंद्र सरकार जब कठोर कार्रवाई न करने का भरोसा दे चुकी है, तब बिहार में प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती क्यों हो रही है।
भाकपा-माले लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। आइसा उनके संगठन से जुड़ा छात्र समूह है।
भट्टाचार्य ने बिहार गृह विभाग के आदेश की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा कीं। उन्होंने इसे भाजपा की एक और पीछे हटने की घटना और जनता की जीत बताया।
25 जुलाई को बिहार के कई जिलों में वामपंथी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। कुछ स्थानों पर भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच चाहते थे। वे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध कर रहे थे।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बंद के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की थी।
सरकार के ताजा आदेश से सैकड़ों परिवारों को राहत मिली है। अब हमारी नजर इस बात पर रहेगी कि मुकदमे वापस लेने और रिहाई की प्रक्रिया जमीन पर कितनी तेजी से पूरी होती है।
