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रूस ने टेलीग्राम संस्थापक पावेल दुरोव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय तलाश शुरू की

रूस ने टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव पर कानूनी शिकंजा कस दिया है। मॉस्को ने उन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

रूस की घरेलू खुफिया एजेंसी एफएसबी के मुताबिक, दुरोव का नाम अंतरराष्ट्रीय वांछित सूची में डाला जाएगा। रूस में जन्मे दुरोव कई साल पहले देश छोड़ चुके हैं।

टेलीग्राम रूस का सबसे प्रभावशाली मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। सरकारी अधिकारी भी इससे पूरी तरह दूर नहीं रह पाए हैं। फिर भी क्रेमलिन लगातार इस ऐप की पहुंच सीमित कर रहा है।

एफएसबी ने टेलीग्राम पर लगाए गंभीर आरोप

एफएसबी का दावा है कि टेलीग्राम ने ऐसे चैट और बॉट बंद नहीं किए, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां और कथित आतंकी संगठन कर रहे थे।

रूसी एजेंसी के अनुसार, इन चैनलों के जरिए लोगों को तोड़फोड़ और हमलों के लिए भर्ती किया गया। टेलीग्राम ने इन गतिविधियों को रोकने की सरकारी मांग नहीं मानी।

दुरोव या टेलीग्राम ने इन खास आरोपों पर विस्तृत जवाब नहीं दिया है।

डेटिंग बॉट के जरिए युवाओं की भर्ती का दावा

एफएसबी ने एक लोकप्रिय डेटिंग चैटबॉट का उदाहरण दिया है। यह बॉट युवा उपयोगकर्ताओं के बीच काफी चर्चित बताया गया।

रूसी खुफिया एजेंसी का आरोप है कि यूक्रेनी सेवाओं ने इसी बॉट के जरिए 46 रूसी युवाओं से संपर्क किया। उनकी उम्र 12 से 22 साल के बीच थी।

एफएसबी के मुताबिक, इन युवाओं को ऐसी गतिविधियों के लिए उकसाया गया, जिन्हें रूस ने आतंकी हमलों की श्रेणी में रखा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

दुरोव ने दिखाई खुली नाराजगी

पावेल दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आपत्तिजनक इशारे वाली तस्वीर पोस्ट कर प्रतिक्रिया दी।

फरवरी में जांच की खबर सामने आने पर उन्होंने रूसी प्रशासन पर तीखा हमला किया था। उनका कहना था कि अधिकारी हर दिन नया बहाना बना रहे हैं, ताकि रूसियों की टेलीग्राम तक पहुंच सीमित की जा सके।

दुरोव ने इसे निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।

रूस में इंटरनेट पर बढ़ता नियंत्रण

साल 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद मॉस्को ने इंटरनेट सेंसरशिप कड़ी कर दी। कई विदेशी वेबसाइटों और सोशल मीडिया सेवाओं पर रोक लगी।

टेलीग्राम कॉल पहले से ब्लॉक हैं। हाल के समय में ऐप की रफ्तार भी धीमी की गई। प्रतिबंधों के बावजूद कई रूसी सरकारी विभाग और अधिकारी अब भी टेलीग्राम चैनल चलाते हैं।

यह विरोधाभास साफ दिखाई देता है। सरकार ऐप को खतरा बताती है, लेकिन अपनी सूचनाएं फैलाने के लिए उसी मंच का सहारा भी लेती है।

यूक्रेन का आरोप है कि रूस भी टेलीग्राम के जरिए यूक्रेनी नागरिकों को तोड़फोड़ की गतिविधियों के लिए भर्ती करता है। मॉस्को ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

टेलीग्राम पर दूसरे देशों में भी सवाल

उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, टेलीग्राम के दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं।

कई देश आरोप लगा चुके हैं कि अपराधी और चरमपंथी इसकी एन्क्रिप्टेड सेवाओं का दुरुपयोग करते हैं। सरकारें चाहती हैं कि टेलीग्राम संदिग्ध सामग्री और खातों पर तेजी से कार्रवाई करे।

दुरोव को 2024 में फ्रांस में गिरफ्तार किया गया था। फ्रांसीसी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि टेलीग्राम ने अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले आपराधिक दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

बाद में उन्हें जमानत मिल गई। फ्रांस में मामला अब भी जारी है।

हम इस घटनाक्रम को सिर्फ एक कानूनी विवाद के रूप में नहीं देखते। यह रूस की डिजिटल निगरानी, युद्धकालीन प्रचार और ऑनलाइन स्वतंत्रता के बीच गहराते टकराव को भी दिखाता है।

By Jayant Jadhav

नमस्ते, मेरा नाम जयंत जाधव है। मैं न्यूज ट्रेंड इंडिया के लिए बेंगलुरु से लिखता हूँ। मेरी रुचि राजनीति, सोशल इश्यूज और तकनीक से जुड़ी खबरों में है। मैं इन विषयों पर विशेषज्ञता के साथ लिखता हूँ। मैंने 2017 में पुणे यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक किया। इसके बाद मैंने दो साल तक एक स्थानीय न्यूजपेपर में काम किया। 2019 से मैं न्यूज ट्रेंड इंडिया से जुड़ा हूँ। मेरा उद्देश्य है, सही और सटीक खबरें आसान भाषा में आप तक पहुँचाना। Email: [email protected]

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