नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी संख्या में संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की हैं।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों का दावा है कि 20 से 24 जुलाई के बीच प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में आपराधिक रिकॉर्ड वाले करीब 400 लोगों की पहचान हुई।
इन चेहरों को फेशियल रिकग्निशन सिस्टम यानी FRS ने चिह्नित किया।
पुलिस अब उनकी गतिविधियों की जांच कर रही है। फोकस 20 जुलाई को नई दिल्ली जिले में हुई हिंसा और तोड़फोड़ पर है।
सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया वीडियो से कुछ ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि वे केवल भीड़ में मौजूद थे या किसी संगठित समूह का हिस्सा थे।
हम इस दावे को अभी पुलिस जांच का हिस्सा मानते हैं। किसी व्यक्ति की प्रदर्शन स्थल पर मौजूदगी अपने आप अपराध साबित नहीं करती।
पुलिस सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान से जुड़े वीडियो भी खंगाल रही है। हर संदिग्ध की लोकेशन, आवाजाही और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
दिल्ली पुलिस बड़े प्रदर्शनों और संवेदनशील आयोजनों में FRS का इस्तेमाल करती रही है। यह तकनीक निगरानी कैमरों में कैद चेहरों का मिलान पुलिस डेटाबेस से करती है।
तकनीक तेज है। सवाल भी गंभीर हैं।
चेहरे की पहचान से सुरक्षा एजेंसियों को पुराने आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। लेकिन गलत मिलान, निजता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर चिंताएं भी बनी रहती हैं।
अब जांच का असली पैमाना सबूत होगा।
कौन हिंसा में शामिल था? किसने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया? और कौन केवल वहां मौजूद था?
इन तीनों के बीच साफ अंतर रखना जरूरी है।
