शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP, ने अपना पांच सप्ताह लंबा आंदोलन समाप्त कर दिया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न देर रात तक चलता रहा। लोग नाचे। नारे लगे। मिठाइयां बांटी गईं। CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने मंच से भावुक होकर कहा, “हमने कर दिखाया।”
CJP कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। यह एक ऑनलाइन व्यंग्य अभियान के रूप में शुरू हुआ था। इसका प्रतीक AI से बनाई गई एक कॉकरोच की तस्वीर है। धीरे-धीरे यही कीड़ा युवाओं के गुस्से, बेचैनी और जिद का निशान बन गया।
आंदोलन की मुख्य मांगें साफ थीं। परीक्षा पत्र लीक पर कठोर कार्रवाई हो। शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो। जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
प्रधान ने X पर लिखा कि वह युवाओं की उम्मीदों और सपनों का सम्मान करते हैं। उन्होंने देश की एकता और छात्रों के भविष्य का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपने की बात कही।
हमने देखा कि यह विरोध केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं रहा। जंतर-मंतर पर लगे कई पोस्टर सीधे मोदी सरकार को चुनौती दे रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पहले प्रधानमंत्री के समर्थक थे, पर अब उनका भरोसा टूट चुका है।
आंदोलन को तब नई ताकत मिली जब शिक्षाविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनकी बिगड़ती सेहत ने देशभर का ध्यान खींचा। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन उन्होंने वहां भी उपवास जारी रखा। सरकारी आश्वासन के बाद उन्होंने हड़ताल समाप्त की।
तनाव तब और बढ़ा जब संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। लाठियां चलीं। आंसू गैस छोड़ी गई। सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे। करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद आंदोलन और फैल गया। विपक्षी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और कई चर्चित चेहरे समर्थन में पहुंचे। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की आलोचना तेज हो गई।
प्रधान के इस्तीफे को विपक्ष ने युवा आंदोलन की जीत बताया। इससे प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत और अजेय नेता वाली छवि को भी चोट पहुंची है।
CJP ने आंदोलन खत्म किया है, लेकिन संघर्ष नहीं। अभिजीत डिपके ने कहा कि संगठन उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग जारी रखेगा, जिनकी मौत परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या से हुई। उन्होंने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जांच भी मांगी।
डिपके का अंतिम संदेश छोटा और तीखा था—“कॉकरोच से मत उलझो।”
