असम में बाढ़ का पानी कई इलाकों में उतर रहा है। फिर भी संकट कम नहीं हुआ। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 78 पहुंच गई है। तीन लाख से अधिक लोग अब भी इसकी चपेट में हैं।
हमारी नजर अब मौसम के अगले दौर पर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इससे नदियों का जलस्तर फिर बढ़ सकता है।
कामरूप मेट्रो, नगांव, सोनितपुर, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर और चराइदेव सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
चराइदेव में सबसे गहरा असर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी ASDMA के अनुसार, बाढ़ से 3,00,031 लोग प्रभावित हैं।
चराइदेव में हालात सबसे गंभीर हैं। यहां 1,37,561 लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित हैं।
पिछले 24 घंटों में तीन लोगों की मौत हुई। शिवसागर में दो और गोलाघाट में एक व्यक्ति ने जान गंवाई। इन मौतों के बाद इस वर्ष बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई।
ऊपरी असम के कई बाढ़ग्रस्त जिलों में बारिश नहीं हुई। इससे डूबे गांवों से पानी धीरे-धीरे निकलने लगा। लोगों को कुछ राहत मिली है, लेकिन वापसी अभी आसान नहीं है।
कई घर टूट चुके हैं। अनेक मकानों के भीतर मोटी गाद और कीचड़ जमा है।
राहत शिविरों में हजारों परिवार
राज्य भर के 71 राहत शिविरों में 16,500 से अधिक विस्थापित लोग रह रहे हैं। प्रशासन ने 30 राहत वितरण केंद्र भी खोले हैं। इनके जरिए 72,000 से अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।
खेती को भी भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ के पानी ने 21,523 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि डुबो दी।
11,000 से अधिक पशु बह गए हैं। करीब 17,000 अन्य जानवर प्रभावित हुए हैं। पशु चिकित्सा दल मैदान में काम कर रहे हैं।
‘ऑपरेशन राहत’ के तहत सेना का अभियान
NDRF, SDRF, स्थानीय एजेंसियां और भारतीय सेना बचाव अभियान चला रही हैं। सेना की स्पीयर कोर ने इस मुहिम को ‘ऑपरेशन राहत’ नाम दिया है।
अभियान शुरू होने के बाद सेना 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा चुकी है। जवानों ने प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता भी दी है।
राहत दलों ने 19 टन अनाज बांटा। 30,500 से अधिक भोजन पैकेट लोगों तक पहुंचाए गए। 43,000 लीटर से ज्यादा पीने का पानी भी वितरित किया गया।
कई जिलों से बचाव अभियान की तस्वीरें सामने आई हैं। कहीं जवान बच्चों को कंधों पर उठाकर पानी पार करा रहे हैं। कहीं नावों से बुजुर्गों और बीमार लोगों को निकाला जा रहा है।
1 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका
ASDMA ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग, लोहित, नामसाई, लोंगडिंग, लोअर सुबनसिरी और लोअर दिबांग घाटी में प्रतिदिन 6 से 11 सेंटीमीटर बारिश की आशंका जताई है।
असम की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे जिले में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है। इसका असर असम के निचले इलाकों पर पड़ने की आशंका है।
तेज बारिश से जलभराव बढ़ सकता है। अचानक बाढ़ आने का खतरा भी बना हुआ है। संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हो सकता है। सड़कों पर यातायात धीमा पड़ने की चेतावनी दी गई है।
हिमंत बिस्वा सरमा ने पुनर्निर्माण का वादा किया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा बनाने का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार टूटी सड़कों, पुलों और सार्वजनिक सुविधाओं का पुनर्निर्माण करेगी। नया ढांचा अधिक मजबूत और भविष्य की आपदाओं के लिए तैयार होगा।
सरमा ने प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ने की बात भी कही।
ओरुनोदोई योजना के तहत मिलेंगे 2,500 रुपये
असम सरकार ने ओरुनोदोई योजना के भुगतान को 1 अगस्त से दोबारा शुरू करने का फैसला किया है।
शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के लाभार्थियों को इस महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह राशि बाढ़ से उबरने और पुनर्वास में मदद करेगी।
महिलाओं के लिए शुरू की गई यह कल्याणकारी योजना 2020 में लागू हुई थी। इस वर्ष चुनाव के कारण इसका भुगतान रोक दिया गया था।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री से की बात
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात की। उन्होंने राज्य में बाढ़ और राहत कार्यों की स्थिति की समीक्षा की।
सात दिनों के भीतर दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बातचीत थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कई क्षेत्रों में पानी कम हुआ है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग घर नहीं लौट पा रहे हैं। उनके मकान क्षतिग्रस्त हैं या कीचड़ और गाद से भरे हुए हैं।
अमित शाह ने राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।
असम में पानी उतरने लगा है, लेकिन खतरा टला नहीं है। अगले दो दिनों की बारिश अब राहत अभियान की दिशा तय करेगी।
