कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का दमदार प्रदर्शन जारी है। सोमवार को बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली और भारी कर दी।
हमारे लिए यह पदक खास है। बिंद्यारानी का यह दूसरा कॉमनवेल्थ पदक है। उन्होंने बर्मिंघम में हुए पिछले खेलों में रजत जीता था।
इस जीत के बाद भारोत्तोलन में भारत के पांच पदक हो गए हैं। सभी खेलों को मिलाकर देश की कुल पदक संख्या छह पहुंच गई।
199 किग्रा वजन उठाकर तीसरे स्थान पर रहीं
बिंद्यारानी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क मिलाकर कुल 199 किग्रा वजन उठाया।
स्नैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 87 किग्रा रहा। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 112 किग्रा उठाया।
नाइजीरिया की रफियातु फोलाशाडे लावल ने 229 किग्रा के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता। कनाडा की एन सोफी टाशेरो 215 किग्रा उठाकर दूसरे स्थान पर रहीं।
लावल ने क्लीन एंड जर्क में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 126 किग्रा वजन उठाया।
स्नैच में दिखा पूरा नियंत्रण
बिंद्यारानी ने स्नैच की शुरुआत 83 किग्रा से की। इसके बाद उन्होंने 85 किग्रा और 87 किग्रा सफलतापूर्वक उठाया।
तीनों प्रयास साफ और संतुलित रहे। 87 किग्रा का अंतिम स्कोर उन्हें पदक की दौड़ में मजबूती से ले आया।
क्लीन एंड जर्क में शुरुआत आसान नहीं रही।
उन्होंने पहले प्रयास में 110 किग्रा उठाने की कोशिश की, लेकिन वजन पूरा नियंत्रित नहीं कर सकीं। दबाव बढ़ गया।
अगले प्रयास में बिंद्यारानी ने शानदार वापसी की। उन्होंने 112 किग्रा उठाकर कांस्य की उम्मीद जिंदा रखी।
अंतिम प्रयास में उन्होंने 116 किग्रा पर दांव लगाया। यह कोशिश सफल नहीं हुई। फिर भी 199 किग्रा का कुल वजन पदक जीतने के लिए पर्याप्त था।
भारतीय भारोत्तोलकों का लगातार शानदार प्रदर्शन
भारत ने रविवार को ही भारोत्तोलन में पदकों का सिलसिला शुरू कर दिया था।
रिशिकांता सिंह ने रजत जीता। मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। राजा मुथुपांडी ने भी रजत हासिल किया।
सोमवार को ज्ञानेश्वरी यादव ने रजत जीतकर टीम का उत्साह बढ़ाया। इसके बाद बिंद्यारानी ने कांस्य के साथ भारत की मजबूत पकड़ कायम रखी।
अब तक भारतीय भारोत्तोलक हर स्पर्धा से पदक लेकर लौटे हैं।
संघर्ष से बनी बिंद्यारानी की पहचान
बिंद्यारानी ने पहली बार 2016 की आईडब्ल्यूएलएफ यूथ नेशनल चैंपियनशिप जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
2019 में उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। उसी साल कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में महिलाओं के 55 किग्रा वर्ग की चैंपियन बनीं।
तब उन्होंने कुल 183 किग्रा वजन उठाया था। इसमें 78 किग्रा स्नैच और 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल था।
उनके करियर का बड़ा मोड़ 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में आया।
स्नैच के बाद वह तीसरे स्थान पर थीं। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 116 किग्रा उठाकर बाजी पलट दी। कुल 202 किग्रा के साथ उन्हें रजत पदक मिला।
मीराबाई चानू का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ा
2025 के नेशनल गेम्स में बिंद्यारानी ने महिलाओं के 55 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता।
उन्होंने स्नैच में 88 किग्रा वजन उठाकर मीराबाई चानू का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। क्लीन एंड जर्क और कुल वजन में भी नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
इसके बाद उन्होंने नया जोखिम लिया। बिंद्यारानी 55 किग्रा से 58 किग्रा वर्ग में चली गईं।
CWG 2026 का कांस्य बताता है कि यह बदलाव सही दिशा में गया। नई श्रेणी में भी उनका संतुलन, ताकत और आत्मविश्वास बरकरार है।
