ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी थमा है, खत्म नहीं हुआ।
रविवार, 26 जुलाई 2026 को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला नहीं किया। फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ने राहत की सांस ली। तेल उद्योग पर मंडरा रहा मिसाइल हमलों का खतरा भी कुछ समय के लिए हल्का पड़ा।
लेकिन तेहरान और वॉशिंगटन के बयान अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 27 जुलाई को कहा कि अमेरिका के साथ इस समय कोई बातचीत नहीं चल रही। हाल की लड़ाई रुकने के बावजूद तेहरान ने औपचारिक वार्ता से इनकार किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा अलग है। उनके अनुसार अमेरिका ईरान के साथ बेहद गंभीर बातचीत कर रहा है। ट्रंप ने चेतावनी भी दी है। कूटनीति नाकाम हुई तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी।
हमले रुके, हथियार तैयार
ईरान ने कहा कि उसने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों पर जवाबी हमले रोक दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ‘फॉक्स न्यूज संडे’ से कहा कि अमेरिकी सेनाएं पूरी तैयारी में हैं। उन्होंने इसके लिए “लॉक्ड एंड लोडेड” शब्द इस्तेमाल किए।
वॉल्ट्ज के मुताबिक ट्रंप फिलहाल बातचीत को थोड़ी जगह देना चाहते हैं।
हम इसे अस्थायी सैन्य विराम के रूप में देख रहे हैं। दोनों पक्ष पीछे हटे हैं, पर किसी ने हथियार नहीं डाले।
लगातार 13 रातों तक हुए अमेरिकी हमले
शुक्रवार, 24 जुलाई से पहले अमेरिकी सेना ने लगातार 13 रातों तक ईरान पर हमले किए थे।
यह करीब पांच महीने से चल रहे युद्ध का सबसे तीखा दौर था। अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद पहली बार संघर्ष इतनी उग्रता से भड़का।
शुक्रवार और शनिवार की रात बमबारी नहीं हुई। रविवार को भी दोनों पक्षों ने हमला रोककर रखा।
इस विराम से खाड़ी क्षेत्र में फिलहाल सन्नाटा है। मगर यह शांति बेहद नाजुक है।
तेहरान बातचीत से इनकार कर रहा है। वॉशिंगटन बातचीत का दावा कर रहा है। अमेरिकी सेना तैयार खड़ी है।
अब अगला कदम तय करेगा कि यह विराम कूटनीति का रास्ता खोलता है या पश्चिम एशिया को फिर मिसाइलों और धमाकों की ओर धकेलता है।
