SIT रिपोर्ट के बाद एमआर अजित कुमार पर कार्रवाई, पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के सुरक्षा कर्मियों को बचाने का आरोप
तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने वरिष्ठ IPS अधिकारी और ADGP एमआर अजित कुमार को निलंबित कर दिया है।
उन पर 2023 के एक राजनीतिक हमले की जांच कमजोर करने का आरोप है। मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के सुरक्षा कर्मियों से जुड़ा है।
दिसंबर 2023 में अलप्पुझा में यूथ कांग्रेस और KSU कार्यकर्ताओं ने विजयन के काफिले को काले झंडे दिखाए थे। आरोप है कि पुलिस और मुख्यमंत्री के सुरक्षा दल ने प्रदर्शनकारियों पर डंडों से हमला किया।
घायलों में एडी थॉमस और अजय ज्वेल कुरियाकोस शामिल थे। थॉमस अब अलप्पुझा से विधायक हैं। विजयन ने उस समय सुरक्षा कर्मियों की कार्रवाई को “बचाव अभियान” बताया था।
नई मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सरकार ने सत्ता संभालने के बाद जांच दोबारा खुलवाई। विशेष जांच दल यानी SIT ने कथित रूप से पाया कि अजित कुमार ने अधीनस्थ अधिकारियों पर रिपोर्ट बदलने का दबाव बनाया।
रिपोर्ट में तथ्यों को दबाने और आरोपी सुरक्षाकर्मियों को विभागीय कार्रवाई से बचाने की कोशिश का भी आरोप है। अजित कुमार ने इन निष्कर्षों पर सार्वजनिक रूप से क्या जवाब दिया है, यह उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री सतीशन ने गृह मंत्री रमेश चेन्निथला से चर्चा के बाद निलंबन को मंजूरी दी। तीन अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की तैयारी है।
हम इस कार्रवाई को केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं देखते।
सवाल राजनीतिक विरोध के अधिकार का है। काला झंडा दिखाना अपराध नहीं। पुलिस की वर्दी किसी सरकार के लिए निजी ढाल भी नहीं बन सकती।
अजित कुमार पहले भी विवादों में रहे हैं। RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से उनकी मुलाकात और 2024 के त्रिशूर पूरम विवाद में उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे। पिछली सरकार ने बाद में उनसे कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी वापस ले ली थी।
अब असली कसौटी आगे की जांच है।
निलंबन एक प्रशासनिक कदम है। जवाबदेही तब तय होगी, जब अदालत और जांच एजेंसियां साफ करेंगी कि रिपोर्ट किसने बदली, आदेश कहां से आए और प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों को किसने बचाया।
