Wed. Jul 29th, 2026

फेड के फैसले से पहले रुपया मजबूत, बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले बुधवार को भारतीय रुपया मजबूत हुआ। घरेलू शेयर बाजार की तेजी ने इसे सहारा दिया। मंदी की उम्मीद लगाए बैठे कई कारोबारियों ने अपनी पोजिशन भी घटाई।

रुपया डॉलर के मुकाबले 95.6475 पर बंद हुआ। इसमें करीब 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। कारोबार के दौरान यह 95.49 तक पहुंचा। यह 10 जुलाई के बाद इसका सबसे मजबूत स्तर रहा।

हमने बाजार में सरकारी बैंकों की डॉलर बिक्री भी देखी। बैंकों ने थोड़े-थोड़े समय के लिए डॉलर बेचे। इससे मासिक वायदा अनुबंधों की एक्सपायरी से पैदा हुई डॉलर मांग का दबाव कुछ कम हुआ।

कच्चे तेल में तेज उछाल

रुपये की मजबूती के बीच कच्चे तेल ने चिंता बढ़ाई।

ब्रेंट क्रूड 3.5 प्रतिशत से अधिक उछलकर 87.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कीमतों को हवा दी।

इराक में अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त हमलों के बाद हालात बिगड़े। क्षेत्र में अमेरिकी बलों की ओर बढ़ रही ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को भी बीच रास्ते में रोके जाने की खबर सामने आई।

शुक्रवार के बाद से ब्रेंट क्रूड में तीखी हलचल दिखी है। इसका भाव 84 डॉलर से 102 डॉलर प्रति बैरल के बीच घूम चुका है। संघर्ष को लेकर आ रही विरोधाभासी खबरों ने बाजार को बेचैन रखा।

फेड के संकेतों पर नजर

इस अस्थिर माहौल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपना मौद्रिक नीति फैसला सुनाने वाला है।

बाजार करीब 30 प्रतिशत संभावना मान रहा है कि फेड ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है।

अनिश्चितता का असर रुपये से जुड़े जोखिम संकेतकों पर भी दिखा। एक महीने की इम्प्लाइड वोलैटिलिटी बढ़कर 5.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह लगभग दो सप्ताह का ऊंचा स्तर है।

गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का मानना है कि फेड अपने बयान में महंगाई के नए खतरों का जिक्र कर सकता है। भू-राजनीतिक तनाव से ऊर्जा की कीमतें बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि फेड इस बैठक में ब्याज दरें नहीं बदलेगा। संस्था ने यह भी कहा कि कम से कम एक सदस्य दर बढ़ाने के पक्ष में असहमति दर्ज कर सकता है।

एशियाई बाजारों में दबाव

वैश्विक शेयर बाजारों में उत्साह कमजोर रहा।

यूरोप और अमेरिका में मामूली बढ़त दिखी। इसके बावजूद निवेशकों की घबराहट कम नहीं हुई। एशियाई बाजारों में तेज बिकवाली ने माहौल बिगाड़ा। चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयर सबसे अधिक दबाव में रहे।

भारत के लिए स्थिति कुछ अलग रही।

भारतीय बाजार का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों पर सीमित निर्भरता इस बार राहत बनी। प्रमुख शेयर सूचकांक 1.1 प्रतिशत चढ़ा।

आईटी शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। इससे पहले एआई के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंकाओं ने इस सेक्टर को बुरी तरह दबाया था।

फिलहाल रुपया मजबूत दिख रहा है। असली दिशा फेड के बयान, कच्चे तेल और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से तय होगी।

By Sreenivas Muthusamy

मेरा नाम श्रीनिवास मुथुसामी है। मैं बेंगलुरु में रहता हूँ और News Trend India वेबसाइट के लिए काम करता हूँ। मेरी खास रुचि राजनीति और विज्ञान से जुड़ी खबरों में है। मैं मुख्यतः टेक्नोलॉजी, हेल्थ और सामाजिक मुद्दों पर लेख लिखता हूँ। मुझे नयी टेक्नोलॉजी पर लेख लिखना बहुत पसंद है। मैंने 2017 में बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक किया। उसके बाद दो साल तक एक लोकल अखबार में रिपोर्टर के रूप में काम किया। 2020 से मैं News Trend India में जुड़ा हूँ। मेरा मकसद है कि मैं पाठकों को सटीक और आसान भाषा में जानकारी दे सकूं। Email: [email protected]

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *