जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी कुल संपत्ति 96.06 करोड़ रुपये घोषित की है। उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास के पास 101.93 करोड़ रुपये की संपत्ति है। ये आंकड़े उनके चुनावी हलफनामे से सामने आए हैं।
बांकीपुर उपचुनाव के लिए उतरे किशोर ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। हमने हलफनामे में दर्ज विवरण देखा। उनके पास 22.19 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है। पत्नी की चल संपत्ति 89.51 करोड़ रुपये बताई गई है।
किशोर की दौलत का बड़ा हिस्सा गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश से जुड़ा है। वे वेधास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में शत-प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इस निवेश की कीमत 95.26 करोड़ रुपये आंकी गई है।
बैंक की सावधि जमा और बाजार निवेश में भी उनके 7.36 करोड़ रुपये से अधिक लगे हैं।
अचल संपत्ति की तस्वीर भी व्यापक है। रोहतास में तीन एकड़ से अधिक भूमि पर फैली एक बंद और जर्जर चावल मिल उनके नाम है। पटना की पाटलिपुत्र कॉलोनी में आवासीय संपत्ति है। नई दिल्ली के वसंत विहार और गाजियाबाद में भी मकान हैं। पुश्तैनी संपत्ति में उनका हिस्सा अलग है।
किशोर की अचल संपत्तियों का कुल मूल्य 73.87 करोड़ रुपये है। उनकी पत्नी की अचल संपत्ति 12.42 करोड़ रुपये की है।
हलफनामे का कानूनी पक्ष भी ध्यान खींचता है। किशोर के खिलाफ आठ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें अधिकतर मुकदमे 2024 और 2025 में दर्ज हुए।
उनके खिलाफ अब तक किसी मामले में दोष सिद्ध नहीं हुआ है। औपचारिक आरोप भी तय नहीं किए गए हैं। फिर भी आरोपों की सूची गंभीर है। इनमें गैरकानूनी जमावड़ा, उपद्रव, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा, आपराधिक साजिश और मानहानि जैसे मामले शामिल हैं।
पटना के गांधी मैदान, सचिवालय और पीरबहोर थानों से जुड़े कई मामलों की कानूनी समीक्षा चल रही है। कुछ प्रकरण पटना हाई कोर्ट के सामने पुनरीक्षण प्रक्रिया में हैं। मानहानि की कुछ शिकायतें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में संज्ञान लिए जाने से पहले के चरण में हैं।
बक्सर से फ्रांस तक पढ़ाई का सफर
प्रशांत किशोर की शैक्षणिक यात्रा कई शहरों और संस्थानों से होकर गुजरी है।
उन्होंने 1991 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत बक्सर के एमपी हाई स्कूल से दसवीं पास की। वर्ष 1993 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उन्होंने 1996 से 1999 के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की।
वर्ष 2001 से 2003 के बीच उन्होंने हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन किया। यह पाठ्यक्रम जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और हिंदुजा अस्पताल के सहयोग से संचालित हुआ था।
वर्ष 2010 में उन्होंने फ्रांस के CAVILAM Vichy से फ्रेंच भाषा का गहन पाठ्यक्रम पूरा किया। यह संस्थान क्लेरमों-फेरां विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
नामांकन से पहले सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन
नामांकन दाखिल करने से पहले किशोर ने स्काउट एंड गाइड ग्राउंड से पदयात्रा निकाली। जुलूस कोतवाली थाना, डाक बंगला, एसपी वर्मा रोड, जेपी गोलंबर और गांधी मैदान से गुजरा। इसका समापन जिला समाहरणालय में हुआ।
हमने यात्रा के रास्ते में जन सुराज कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों और समर्थकों की भारी भीड़ देखी। सड़कें नारों से गूंजती रहीं।
समर्थक लगातार आवाज लगा रहे थे—“लड़ेंगे बांकीपुर, जीतेंगे बांकीपुर।”
नामांकन के बाद किशोर ने मीडिया से कहा कि यह केवल उनकी उम्मीदवारी नहीं है। उनके अनुसार यह बदलते बिहार और राज्य के बेहतर भविष्य का नामांकन है। उन्होंने इसे सत्ता से अपराधियों को हटाने के अभियान की शुरुआत बताया।
