योगी के ‘दलित हनुमान जी’ और राहुल के ‘गोत्र’ वाले बयान का कितना फायदा-कितना नुकसान

नई दिल्ली:  हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। तय हो चुका है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान बीजेपी के हाथ से फिसलकर कांग्रेस के हाथ में चला गया। इस चुनाव में मुद्दों की राजनीति के साथ-साथ धर्म के नाम पर राजनीति भी देखने को मिला। अब सवाल उठता है कि किसने किन मुद्दों को तरजीह दी और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का कितना फायदा उस पार्टी को मिला।

यहां ये साफ कर दूं कि राजनीति में धर्म का इस्तेमाल दोनों प्रमुख पार्टियों यानि बीजेपी और कांग्रेस की तरफ से किया गया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जहां बजरंग बली को दलित समुदाय से जोड़ दिया वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुष्कर में चुनाव प्रचार के दौरान अपना गोत्र बताया था। इसकी खूब चर्चा भी हुई। ठीक उसी तरह जिस तरह से योगी के बजरंग बली को दलित बताने वाले बयान की चर्चा हुई थी।

लेकिन खासबात ये है कि दोनों ही पार्टियों की इस कोशिश को जनता ने नकार दिया। योगी ने अलवर हनुमान जी को दलित बताया था। अलवर में विधानसभा की 11 सीटें हैं। लेकिन बीजेपी को इनमें से केवल 2 ही सीटों पर जीत मिली। जबकि पिछले चुनाव में पार्टी ने यहां 9 सीटें जीती थी। अमित शाह ने भी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मंदिरों के चक्कर लगाए थे। लेकिन मतदाताओं ने इसे तवज्जो नहीं दिया।

उसी तरह से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान के पुष्कर में अपना गोत्र बताया था। लेकिन कांग्रेस को यहां हार का सामना करना पड़ा। जबकि उदयपुर में राहुल ने कहा था मोदी को धर्म की समझ नहीं है। लेकिन इस बयान का पार्टी को फायदा नहीं हुआ। यहां की 10 सीटों में से कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली।

लेकिन कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया। जिसका फायदा पार्टी को मिला। कांग्रेस ने किसानों और युवाओं के मुद्दे यानि रोजगार को तरहीज दी। इसपर सरकार की नाकामी को जनता के सामने रखा। जिसका प्रभाव भी मतदाताओं पर पड़ा और जनता ने सत्ता परिवर्तन का मन बनाया। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने मुद्दों पर आधारित चुनाव प्रचार किया। नतीजा रहा स्पष्ट बहुमत। जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में ऐसा नहीं हुआ। सरकार तो कांग्रेस की बन जाएगी लेकिन स्पष्ट बहुमत में परेशानी हुई।

जबकि बीजेपी की राजनीति धर्म आधारित चुनाव प्रचार की रही। जिसका उसे खामियाजा भी भुगतना पड़ा। जनता ने धर्म आधारित सियासत को नकारते हुए तीनों राज्यों से बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर दिया।

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