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झारखंड महिला कांग्रेस CM के लिए लाई चूड़ियों की सौगात, सरकार ने नहीं खोले अपने द्वार

झारखंड महिला कांग्रेस CM के लिए लाई चूड़ियों की सौगात, सरकार ने नहीं खोले अपने द्वार




रांची/झारखंड: झारखंड सरकार ने जब से ये एलान किया गया है कि राज्य में सरकार खुद शराब बेचेगी। उसके बाद से सरकार की इस सोच और इस फैसले का विरोध भी शुरु हो गया है। इस विरोध की खास बात ये है कि इसकी कमान महिलाओं ने थामी है। राज्य के अलग अलग हिस्सों में गांव से लेकर शहर तक में महिलाएं सरकार के इस फैसले के विरोध में खड़ी दिखाई दे रही हैं।

झारखंड के अलग अलग जिलों से महिलाओं की तरफ से इकट्टा किये गए चूड़ी, सिंदूर और बिंदी की सौगात लेकर झारखंड महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता रांची पहुंची। पिछले हफ्ते भर से महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता सीएम से मुलाकात का वक्त मांग रही थीं। ताकि वो अपनी बात राज्य सरकार के सामने रख सकें। लेकिन जब सीएम रघुवर दास की तरफ से वक्त नहीं दिया गया तो उनके सब्र का बांध टूट गया। और टोकरी में चूड़ियों की सौगात लेकर सीएम आवास की तरफ महिला कांग्रेस की नेताओं के कदम बढ़ चले।

jharkhand-liqour-bannedसीएम आवास के दरवाजे पर महिला कांग्रेस की अध्यक्ष आभा सिन्हा, गोड्डा महिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपिका पांडे सिंह, पूर्णिमा सिंह, बॉबी भगत, गायत्री दास, लीलावती देवी, सरोजनी भगत, हेमा मिंग समेत कई महिला कार्यकर्ता और नेता पहुंची थीं। राज्य सरकार की शराब नीति के खिलाफ महिलाओं के इस प्रचंड विरोध के सामने सीएम आवास का द्वार तो नहीं खुला लेकिन सामने द्वारपालों ने उनका रास्ता रोक लिया।

सीएम आवास के गेट तक पहुंची महिला कांग्रेस की नेताओं को जब वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हट जाने को कहा तो इनका कहना था कि सीएम से मिले बिना नहीं जाएंगे। अपनी मांगों को लेकर महिला कांग्रेस की सभी नेता वहीं बैठ गईं। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ नोंक झोंक भी हुई। जिसके बाद जबरन सभी महिलाओं को हिरासत में लिया गया। बल पूर्वक उन्हें वहां से हटाया गया। लेकिन जाते जाते महिलाएं अपने साथ लाए गए चूड़ी, सिंदूर और बिंदी को सीएम आवास के गेट के सामने छोड़ गईं।

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष आभा सिन्हा ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत वाली रघुवर सरकार अंधी हो गई है। उन्होंने एलान किया कि शराबबंदी के लिए राज्य भर में आंदोलन और तेज किया जाएगा। हलांकि सदर डीएसपी ने लाठीचार्ज के आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि सीएम आवास के सामने निषेधाज्ञा लागू होने की वजह से महिलाओं को हिरासत में लिया गया।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरु हुआ आंदोलन

सरकार के शराब बेचने के इस फैसले के खिलाफ महिलाओं ने जो मुहिम शुरु की है उसे नाम दिया गया है #हमारीनाहै । विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि बिहार में शराब बंदी लागू होने के बाद सभी ने उम्मीद की थी कि अब झारखंड में भी शराब बंदी लागू की जाएगी। लेकिन इसके उलट यहां सरकार खुद शराब बेचने जा रही है।

कई हफ्तों से झारखंड की रघुवर सरकार के इस फैसले के खिलाफ राज्य के अलग गांव और कस्बों में #हमारीनाहै मुहिम चलाई जा रही थी। जिसमें महिलाओं से ये अपील की जा रही थी कि वो अपनी चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी राज्य सरकार को सौंपें। इसका मकसद ये था कि सरकार को ये एहसास दिलाया जाए कि जिस महिला को कमजोर समझा जाता है वो खुद में फैसले लेने के लिए सक्षम हैं लेकिन राज्य सरकार शराबबंदी जैसे मजबूत फैसले लेने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है।

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