नीतीश के चाणक्य पंजाब मे भी दिखाएंगे कमाल ?

नीतीश के चाणक्य पंजाब मे भी दिखाएंगे कमाल ?

Prashant Kishor को पंजाब बुलाने की तैयारी में कैप्टन अमरिंदर सिंह
पहले मोदी, फिर नीतीश अब कैप्टन अमरिंदर सिंह !

लोकसभा चुनाव में चेहरा तो नरेंद्र मोदी का दिखाई देता था। लेकिन उस चेहरे की मुस्कान के पीछे जो चेहरा था वो था Prashant Kishor नाम के शख्स का। इसी Prashant ने लोकसभा चुनाव में मोदी के चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई थी। रणनीति कामयाब रही और मोदी प्रधानमंत्री बन गए। लोकसभा चुनाव के तकरीबन डेढ़ साल बाद बिहार में विधानसभा चुनाव हुआ। ये चुनाव नीतीश कुमार के लिए आसान नहीं था। क्योंकि परिस्थिति काफी विषम थी। उस विषम परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने के लिए नीतीश कुमार ने उसी Prashant Kishor का सहारा लिया जिसने मोदी को पीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई थी। अब उसी Prashant Kishor को पंजाब बुलाने की तैयारी चल रही है। यानि वो Prashant Kishor जिसकी सधी रणनीति के सामने मोदी से लेकर नीतीश तक के विरोधी पस्त हो गए उसी के हाथों कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी तकदीर लिखवाना चाहते हैं।

क्या खास है Prashant Kishor में ?

पंजाब के पूर्व सीएम और पंजाब कांग्रेस के नव नियुक्त अध्यक्ष के लिए पंजाब से बादल की सत्ता छीनना बड़ी चुनौती है। उनसे दिल्ली में बैठी कांग्रेस आलाकमान को काफी उम्मीद भी है। शायद इसी वजह से 2017 में होनेवाले विधानसभा चुनाव से तकरीबन सवा साल पहले पंजाब में पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंप दी। कैप्टन के सामने खुद को साबित करने का चुनौती है। इस चुनौती को पार करने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह नीतीश के रणनीतिकार Prashant Kishor की तरफ देख रहे हैं। इसे लेकर दिल्ली में Prashant Kishor और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच कई दौर की मुलाकात भी हो चुकी है। Prashant Kishor को पंजाब बुलाने को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी तैयारी कर ली है। लेकिन इंतजार दस जनपथ से ग्रीन सिग्नल मिलने का है।

बस 10 जनपथ से ग्रीन सिग्नल मिल जाए

कैप्टन और Prashant Kishor के बीच हुई बातचीत में एक तरह से रजामंदी बन चुकी है। लेकिन मोदी और नीतीश के लिए कामयाब चुनावी रणनीति बना चुके Prashant Kishor को पंजाब बुलाने पर आखिरी फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को करना है। कैप्टन ने अपने स्तर पर तैयारी कर ली है। Prashant की उपयोगिता की गवाही उसकी दो कामयाब रणनीति देती हैं। दूसरी तरफ Prashant Kishor ने भी खुद को इस नई चुनौती के लिए तैयार कर रखा है। पंजाब में कांग्रेस खासकर कैप्टन अमरिंदर सिंह की छवि और राज्य के पॉलीटिकल मूड का अदाजा लगाने के लिए Prashant Kishor को तकरीबन 20 दिन का वक्त चाहिए। यानि यहां इंतजार उपर से आदेश होने का हो रहा है।

Prashant Kishor की रणनीति को कहां आ सकती है दिक्कत?

बिहार में Prashant Kishor ने जबसे नीतीश के चुनाव अभियान की कमान संभाली तब से चुनाव प्रचार से जुड़े हर फैसले Prashant की रजामंदी के बाद ही लिये जाते थे। लेकिन पंजाब मे इसमें कुछ दिक्कत आ सकती है। क्योंकि जेडीयू की तरह कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टी नहीं है। एक राष्ट्रीय पार्टी है। फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपनी एक तय सीमा है। और उससे बाहर जाकर वो फैसले नहीं ले सकते। चुनावी रणनीति और चुनाव प्रचार के दौरान भी अगर कैप्टन कोई असाधारण फैसला लेंगे तो उसके लिए उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रजामंदी लेनी होगी। ये एक मुश्किल बन सकता है। लेकिन जहां मकसद एक राज्य में जीत हासिल करने की हो तो उसके लिए इतना समझौता तो करना पड़ेगा।

Loading...

Leave a Reply