अखिलेश सरकार बनाने के लिए मायावती से गठबंधन करेंगे?

लखनऊ: विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। बीबीसी को दिये इंटर्व्यू में अखिलेश ने कहा कि अगर जरुरत हुई तो किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई नहीं चाहेगा कि यूपी में राष्ट्रपति शासन लगे। उन्होंने आगे कहा हम नहीं चाहते कि यूपी में रिमोट से सरकार चले। इसलिए किसी भी हालात के लिए हम तैयार हैं।

अखिलेश के इस बयान पर बीएसपी सूत्रों का कहना है कि किसके साथ जाना है या किसको समर्थन देना है इसपर चुनाव के नतीजे आने के बाद कुछ कहा जाएगा।

बीबीसी की तरफ से अखिलेश यादव से सवाल किया गया था कि किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में समाजवादी पार्टी की क्या रणनिति रहेगी। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि हमारा बहुमत आनेवाला है और हम सरकार बनाने वाले हैं। अखिलेश आगे बोले हां अगर सरकार बनाने के लिए जरुरत पड़ी तो देखिए, कोई नहीं चाहेगा कि यूपी में राष्ट्रपति शासन हो और बीजेपी रिमोट कंट्रोल से राज्य की सरकार चलाए।

अखिलेश ने आगे कहा मैंने हमेशा मायावती को एक रिश्ते के तौर पर संबोधित किया है। इसलिए लोगों को लगता है कि हम उनके साथ गठबंधन कर सकते हैं। अखिलेश ने ऐसा कहकर उस संभावना को और ताकत दे दी है जो आजम खान के बयान के बाद प्रबल हुई थी। आजम खान ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी की हार होती है तो अखिलेश अकेले जिम्मेदार नहीं होंगे। उनकी हार सबकी हार होगी।

आजम के बयान से इतना तो स्पष्ट हो जता है कि अपनी बड़ी जीत से सपा का विश्वास कम हो रहा है। और जहां एक वक्त में डंके की चोट पर पार्टी की तरफ से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के दावे किये जा रहे थे अब वो दावा कमजोर हुआ है। पार्टी के ही एक और नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन कर पार्टी को नुकसान हुआ।

हलांकि अखिलेश का बयान सामने आने के बाद और बीएसपी के साथ गठबंधन की हवा जब जोर पकड़ी तो पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल बचाव में सामने आए और उन्होंने कहा अखिलेश ने बीएसपी या बहनजी का नाम नहीं लिया है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेश से सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने का है।

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