कैसे हुई महिलाओं में मासिक धर्म की शुरुआत, तब पुरुषों को मासिक धर्म होता था?

कैसे हुई महिलाओं में मासिक धर्म की शुरुआत, तब पुरुषों को मासिक धर्म होता था?

नई दिल्ली:  रजस्वला होने वाली कई लड़कियों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर उन्हें ही क्यों मासिक धर्म के दर्द से गुजरना पड़ता है। पुरुषों को क्यों नहीं होता है मासिक धर्म। इस तरह के कई सवाल हैं जो आमतौर पर लड़कियां आपस में किया करती हैं। इस सवाल का जवाब जानने के लिए सृष्टि की उत्पत्ति में जाना होगा। क्योंकि महिलाओं के मासिक धर्म का संबंध उसी वक्त से जुड़ा है।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक मासिक धर्म का संबध केवल स्त्रियों से नहीं बल्कि पुरुषों से भी रहा है। एक वो भी था जब पुरुषों को मासिक धर्म हुआ करता था। हो सकता है आधुनिक विचारधारा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले व्यक्ति को ये बातें असत्य लगें। लेकिन पौराणिक ग्रंथों में इसी तरह की बातें बताई गई हैं।

सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले त्रिदेव प्रकट हुए। जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपनी नाभी से ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया। बताया जाता है कि भगवान विष्णु ने ही अपने अंगूठे से गंगा को भी उत्पन्न किया। उसके बाद विष्णु ने सृष्टि के निर्माण का काम ब्रह्माजी को सौंप दिया। ब्रह्रमाजी ने अपने तपोबल से आठ संतानों को जन्म दिया। इनमें से सात सप्तऋषि हुए जबकि आठवें नारद मुनि थे।

ब्रह्माजी द्वरा सृष्टि के निर्माण की गति काफी धीमी थी। जिसके बाद शिवजी ने अर्धनारीश्वर का रूप धारण किया। माना जाता है तभी से धरती पर नारी का आगमन हुआ। इसके बाद शिवजी ने ब्रह्माजी से कहा कि वो स्त्री एवं पुरुष के समागम से मैथुनी सृष्टि का विकास करें। बाताया जाता है उसी के बाद से स्त्रियां रजस्वला (मासिकधर्म) होनें लगीं। इससे पहले तक भगवान ही रजस्वला होकर सृष्टि का निर्माण करते थे।

एक कथा ये भी प्रचलित है कि एक दिन माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से कहा कि उन्हें पुरुषों के वस्त्रों पर लाल छींटें अच्छे लगते हैं। पार्वती को समझाने की काफी कोशिश की गई लेकिन वो नहीं मानीं। जिसके बाद भगवान शिव ने पार्वती को ये आशीर्वाद दिया कि अब पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं सजस्वला होंगी और उन्हें ही संतान की उत्पत्ति करनी होगी।

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