मुलायम ने बताया 1990 में कार सेवकों पर क्यों चलवाई थी गोली?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2017 में होगा। लेकिन तैयारी शुरु हो चुकी है। पार्टियां अपने अपने वोटबैंक पर डोरे डाल रही है कोशिश ये है कि दूसरे दलों की बातों में आकर कहीं उनका जनाधार खिसक न जाए। समाजवादी पार्टी के लिए यूपी में सत्ता की दूसरी पारी की शुरुआत एक चुनौती है। इसलिए तैयारी में खुद मुलायम भी शामिल हैं।

समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने 1990 के अयोध्या पर कहा है कि देश की एकता बनाए रखने के लिए कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश देना पड़ा। अगर तब गोली नहीं चलवाते तो मुसलमानों का देश पर से भरोसा उठ जाता। मुलायम ने आगे कहा कि सिस्टम पर भरोसा कायम रखने के लिए 16 की जगह 30 लोगों की भी जान जाती तो वो पीछे नहीं हटते। अयोध्या में 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों पर फायरिंग की गई थी। उस वक्त मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और विश्व हिंदु परिषद का राम मंदिर आंदोलन जोरों पर था।

मुलायम अपने ऊपर लिखी किताब का विमोचन कर रहे थे। वहां उन्होंने बताया कि कार सेवकों पर गोली क्यों चलाई गई। ‘अगर ऐसा न होता तो हिंदुस्तान का मुसलमान कहता कि अगर हमारा धर्म स्थल नहीं बच सकता, तो हिंदुस्तान में रहने का क्या औचित्य। समाजवाद का मतलब सबको साथ लेकर चलना है। सामाजिक एकता के लिए किसी किस्म का भेदभाव नहीं होना चाहिए।‘

26 साल बाद मुलायम को राम मंदिर, अयोध्या, कारसेवक और मुसलमानों की याद यूं ही नहीं आई है। जिस तरह मायावती दलित वोटबैंक के भरोसे यूपी में सत्ता पाने की कोशिश कर रही है उसी तरह से मुसलमान समाजवादी पार्टी का वोटबैंक माने जाते हैं। खासकर यूपी में कांग्रेस के कमजोर होने के बाद समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों को अपनी तरफ खींचने में कामयाबी हासिल की। लेकिन इस बार कांग्रेस दोबारा से राज्य में मजबूती हासिल करने की कोशिश में है। सपा भी इस खतरे का एहसास कर रही है। इसलिए ये भी जरुरी हो गया है कि मुसलमानों को पुरानी बातें याद दिलाकर ये एहसास कराया जाए कि सपा हमेशा से मुसलमानों की हितैषी रही है।

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