बदल गया इकोनॉमिक सर्वे का रंग, इस वजह से चुना गया गुलाबी रंग

बदल गया इकोनॉमिक सर्वे का रंग, इस वजह से चुना गया गुलाबी रंग

नई दिल्ली:  केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। इसबार का इकोनॉमिक सर्वे पहले के मुकाबले काफी अलग रहा। सबसे बड़ी बात इसके रंग को लेकर है। इसबार इकोनॉमिक सर्वे को गुलाबी रंग में पेश किया गया। इस रंग के चुनाव के पीछे एक खास वजह है।

इकोनॉमिक सर्वे का चुनाव इसलिए किया गया ताकि महिलाओं के सशक्तिकरण और महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को खत्म करने के लिए लगातार बढ़ रहे अभियान के समर्थन को प्रदर्शित किया जा सके।

डायरेक्ट और इनडायरेक्ट कर दाताओं की संख्या में इजाफा

संसद में पेश किये गए आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक जीएसटी से इनडायरेक्ट टैक्स पेयर्स की संख्या पूर्व जीएसटी व्यवस्था से 50 फीसदी अधिक है।

ग्लोबल ट्रेड से राज्यों की कमाई

केंद्र सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के आधार पर राज्यों की कमाई उनके द्वारा किये जा रहे ग्लोबल ट्रेड और इंटरस्टेट ट्रेड पर निर्भर रही।

एक्सपोर्ट सेक्टर दूसरे देशों से बेहतर

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक देश की टॉप 1 फीसदी कंपनियां देश का कुल 38 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं। जबकि दूसरे देशों में ये आंकड़ा भारत से खराब है। ब्राजील में टॉप 1 फीसदी कंपनियां 72 फीसदी एक्सपोर्ट करती है। जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बड़ी चुनौती

अगले वित्त वर्ष में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रही उछाल है। इस दौरान वैश्विक स्तर पर विकास दर में सुधार होने की उम्मीद है। जीएसटी में सुधार और निवेश का स्तर सुधरने से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत रहेगी।

गैर कृषि रोजगार उम्मीद से बेहतर

सोशल सिक्योरिटी आंकड़ों के आधार पर गैर कृषि क्षेत्र में रोजगार में 30 फीसदी की बढ़त आई है। जबकि जीएसटी के तहत आंकड़ों में रोजगार में 50 फीसदी की बढ़त है।

आर्थिक सुधार चलते रहेंगे

अगले वित्त वर्ष में सरकार को जीएसटी को सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ दोहरी बैलेंस शीट, एयर इंडिया के निजीकरण और व्यापक आर्थिक मुद्दों की स्थिरता पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

कमाई के मामले में केंद्र से आगे राज्य

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अप्रैल-नवंबर 2017 तक टैक्स में राज्यों का हिस्सा 25.2 फीसदी बढ़ा है। जबकि केंद्र सरकार का नेट टैक्स रेवेन्यू में केवल 12.6 फीसदी का इजाफा हुआ है।

सरकार के पास ये हैं ट्रंप कार्ड

केंद्र सरकार के मुताबिक 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू करने, दोहरी बैलेंस शीट की समस्या को हल करने के लिए बैंकरप्सी कोड के प्रावधान, सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए रीकैपिटेलाइजेशन प्लान, विदेशी निवेश के नियमों को और सरल करने और वैश्विक आर्थिक सुधार की स्थिति में अच्छे निर्यात के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 6.75 की दर से बढ़ सकती है।

शहरों को वित्तीय संसाधन जुटाने की जरुरत

देश की शहरी जनसंख्या 2031 तक 600 मिलियन का आंकड़ा पार कर सकती है। इसलिए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि शहरों को म्यूनिसिपल बॉन्ड, PPP और क्रेडिट रिस्क गारंटी के जरिये अपने लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की जरुरत है।
एफडीआई से सरकार को उम्मीद

वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में कुल एफडीआई से संचार में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में 55.56 बिलियन डॉलर एफडीआई की तुलना में इस वर्ष देश में 60.08 बिलियन डॉलर का कुल एफडीआई संचार में रहा।

Loading...