क्रिकेट को स्पॉन्सर करनेवाली कंपनियां क्यों क्रिकेट से दूर हो रही हैं ?

क्रिकेट को स्पॉन्सर करनेवाली कंपनियां क्यों क्रिकेट से दूर हो रही हैं ?

क्रिकेट वर्ल्ड कप, IPL, T 20 टूर्नामेंट की जगह स्पोर्ट्स स्पॉन्सर कंपनियां दूसरे खोलों की तरफ आकर्षित हो रही हैं। अगर इसका सीधा मतलब बताया जाए तो कहा जा सकता है कि जिस क्रिकेट में स्पोर्ट्स स्पॉन्सर कंपनियां पैसा पानी की तरह बहाया करती थीं अब वो कंपनियां दूसरे खेलों को स्पॉन्सर करने में रूची दिखा रही हैं। 2015 में सामने आए एक रुझान में ये बात निकलकर सामने आई है। जिसके मुताबिक क्रिकेट के स्पॉन्सरशिप में केवल 13.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। जबकि कबड्डी में 300 फीसदी और दूसरे खेलों में 30 फीसदी खर्च किया स्पोर्ट्स स्पॉन्सर कंपिनयों ने। स्पोर्टिंग नेशन द मेकिंग नाम से एक स्टडी जारी किया गया। जिसमें कहा गया है कि कबड्डी, इंडियन सुपर लीग, ICL, इंडियन बैडमिंटन लीग जैसे आयोजनों से कबड्डी, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन और टेनिस में लोगों की रुची बढ़ी है। पहले जहां कंपनियां स्पोर्ट्स स्पॉन्सर के तौर पर 90 पैसा क्रिकेट पर खर्च करती थी वहीं अब वो घटकर 70 फीसदी रह गया है।

किस खेल में कितना बढ़ा रेवेन्यू ?
कबड्डी में 300 फीसदी, फुटबॉल में 92 फीसदी, टेनिस में 32 फीसदी, क्रिकेट में 13.9 फीसदी और अन्य खेल पर 18 फीसदी रेवन्यू बढ़ा। मतलब साफ है जिस देश में क्रिकेट को सबकुछ माना जाता है वहां अब स्पोर्ट्स स्पॉन्सर कंपनियां क्रिकेट के बजाय दूसरे खेलों की तरफ आकर्षित हो रही हैं। दूसरे खेलों को स्पॉन्सर करने में कंपनियां पहले इसलिए असमंजस में रहती थी क्योंकि उसे देखनेवाले नहीं थे। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। लोगों का रुझान क्रिकेट के साथ साथ दूसरे खेलों की तरफ बढ़ रहा है। नतीजतन कंपनियां उन खेलों को अपने प्रचार का जरिया बनाने के लिए सामने आ रही है।

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