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पाक सरकार से पाक अखबार के सवाल-‘हाफिज और मसूद अजहर पर कार्रवाई क्यों नहीं?‘

पाक सरकार से पाक अखबार के सवाल-‘हाफिज और मसूद अजहर पर कार्रवाई क्यों नहीं?‘

दिल्ली: पाकिस्तान की सरकार की नीयत पर शक तो कुछ एक देश को छोड़कर दुनिया के सभी देशों को है। लेकिन अब उसकी नीयत पर सवाल देश के भीतर से ही उठ रहे हैं। सवाल सीधे सीधे नवाज शरीफ से किये जा रहे हैं कि आखिर वो कौन सी मजबूरी है कि सरकार जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और जमात-उत-दावा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने से डरती है। पाकिस्तान की सरकार ऐसा क्यों मान रही है कि उनपर कार्रवाई करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ के संपदकीय में लिखा गया है कि हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने के बदले सेना और सरकार प्रेस को भाषण दे रही है। प्रेस को ये समझाया जा रहा है कि उसे किस तरह से काम करना है। संपादकीय में लिखा गया है कि वह बहुत ही खराब दिन था जब सेना और सरकार के उच्च स्तरीय लोग प्रेस को उनका काम करने की तरीके पर लेक्चर देने के लिए मिले थे।
आगे लिखा गया है कि सिरिल अलमेडा की रिपोर्ट को बनावटी और काल्पनिक बताया गया। लेकिन सेना और सरकार के उच्च स्तरीय लोगों ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि क्यों नेशनल एसेम्बली के सदस्य बैन पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसा क्यों है कि हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ होने वाली कोई कार्रवाई से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है? संपादकीय में ये सवाल भी पूछे गए हैं कि पाकिस्तान क्यों अलग-थलग पड़ता जा रहा है?

अखबार के संपादकीय में सरकार को चुनौती भी दी गई है और सवाल भी पूछे गए हैं कि सरकार और सेना की यह हिम्मत कैसे हो गई कि वो मीडिया को यह बताएं कि वे अपना काम कैसे करें। उनकी यह हिम्मत कैसे हो गई कि सम्मानित पत्रकार के साथ अपराधी जैसा सुलूक हो और उन्हें यह तय करने का अधिकार या योग्यता कैसे मिल गई कि देश का राष्ट्रीय हित क्या है? सरकार को साफ संदेश दिया गया है कि अलमेडा के साथ प्रेस है।

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