बदरुद्दीन अजमल के बढ़ते कद से सेना प्रमुख चिंतित, जानिये कौन हैं बदरूद्दीन

नई दिल्ली:  सेना प्रमुख एक कार्यक्रम में असम में बांग्लादेशी घुसपैठ को चिंता का विषय बताया था। इसी कार्यक्रम में उन्होंने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डोमोक्रेटिक फ्रंट यानि AIUDF का भी नाम लिया था। उन्होंने कहा था कि जिस रफ्तार से बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF का विस्तार हुआ। जो चिंता की बात है।

सेना प्रमुख के इस बयान पर सियासी भूचाल आ गया है। हर तरफ से इसपर प्रतिक्रिया आ रही है। बदरुद्दीन ने सेना प्रमुख के बयान पर कहा कि वो बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं। असद्दुद्दीन ओवैसी ने सेना प्रमुख को सियासत से अलग रहने की सलाह तक दे डाली। जिस बदरुद्दीन पर इस तरह का हंगामा मचा है आईये जानते हैं इसके पीछे वजह क्या है।

बदरुद्दीन ने अपनी पार्टी AIUDF की स्थापना 2005 में की थी। उसी साल सुप्रीम कोर्ट ने अवैध आप्रवासी कानून को रद्द कर दिया था। इसके लिए वर्तमान में असम के सीएम और उस वक्त ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन के नेता के तौर पर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। आइएमटीडी कानून ने अवैध आप्रवासियों की पहचान की जिम्मेदारी न्यायाधिकरणों पर डाल दी थी। साथ ही संदिग्ध लोगों की नागरिकता को साबित करने का भार शिकायत करनेवालों पर डाल दिया। आप्रवासी मुसलमान मानते हैं कि केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का यह कानून उन्हें उत्पीड़न से बचाने वाला है।

एक वेबसाइट की खबर के मुताबिक 2011 में बराक घाटी की यात्रा में तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने हिंदू आप्रवासियों के हितों की रक्षा करने की बात कही। यहां से बदरुद्दीन की सियासत की शुरुआत हुई। 2006 के चुनाव में उनकी पार्टी AIUDF को 10 सीटें मिली थी। लेकिन 2011 में उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 18 हो गई। ये सीटें उन इलाकों में जीती गईं जहां बांग्लाभाषी और मुस्लिम बहुल जनसंख्या थी।

इस बड़ी जीत के बाद असम की सियासत में AIUDF का कद बढ़ा और वो मुख्य विपक्षी दल बन गई। 2014 के लोकसभा चुनाव में उसके खाते में 3 सीटें आई। जबकि 2009 के लोकसभा चुनाव में उसके पास केवल 1 सीट थी।

अजमल का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। मुंबई में कपड़ों, रियल एस्टेट, चमड़ा, इत्र जैसे कारोबार से जुड़े हैं बदरुद्दीन। बदरुद्दीन के अलावे उनके दोनों बेटे अब्दुल रहमान अजमल, अब्दुल रहीम अजमलु और भाई सिराजुद्दीन राजनीति से जुड़े हैं।

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