सोनी की खुदकुशी से AAP इतनी डरी हुई क्यों है?

सोनी की खुदकुशी से AAP इतनी डरी हुई क्यों है?

दिल्ली के नरेला में अगर एक पत्ते के सरसराने की भी आवाज आती है तो आज डर लग रहा है। जो कभी डंके की चोट पर दूसरों से उसके काम का हिसाब मांगा करते थे आज वो जरुरत से ज्यादा खामोश हैं। इतनी खामोशी तो उस वक्त भी नहीं छाई थी जब दिल्ली में AAP की सत्ता डगमगाई थी। आखिर क्या है AAP के इस डर की वजह?

AAP के विधायक तो इतने कर्मठ हैं कि आधी रात को अफ्रीकी मूल की महिला के घर छापेमारी करने पहुंच जाते हैं। ये और बात है कि AAP के उसी विधायक (सोमनाथ भारती) के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप ये लगाया गया है कि उन्होंने महिला से छेड़छाड़ के लिए लोगों को उकसाया।

soni-suicide-caseAAP वही पार्टि है जो खुद के अलग स्तित्व का दावा करती है। जो ये कहती है सभी अच्छे लोगों को बीजेपी छोड़ देनी चाहिए। जो ये कहती है कि राजनीति एक कीचड़ है, जो ये कहती है कि हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, जो ये कहती है कि सभी बेइमानों की जगह जेल में होगी, जो ये कहती है कि बीजेपी दलितों की दुश्मन है, जो ये कहती है कि सब आपस में मिले हुए हैं… लेकिन आज उसी आम आदमी पार्टी के कलंदरों के पास इतनी भी हिम्मत नहीं बची कि वो सामने आकर ये कह सकें कि सोनी ने खुदकुशी क्यों की ? सोनी नाम की कार्यकर्ता की खुदकुशी से इतनी डर गई पूरी पार्टी कि वो इतना भी नहीं कह सकी कि सोनी ने जो आरोप लगाए हैं उसकी जांच होगी।

IMAGE- POSTER (SENT ON WHATSAPP)
सिविल लाइंस से नरेला की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है। कम से कम दिल्ली से गुजरात, दिल्ली से गोवा और दिल्ली से पंजाब से तो कम ही दूरी पर है नरेला। जहां सोनी ने खुदकुशी की। लेकिन वहां तक AAP के एक भी नेता नहीं पहुंच सके। क्योंकि सोनी के घर की तरफ देखने की हिम्मत तक नहीं बची थी AAP के बाहुबलियों के पास। उस तरफ पैर बढ़ाने की बात तो छोड़ ही दीजिये।

सोनी के आरोप गंभीर थे। आम आदमी पार्टी के नाम उसने अपनी जिंदगी कर दी थी। क्योंकि राजनीति के कीचड़ को साफ करने के लिए बनी थी ये पार्टी। लेकिन उस कीचड़ को साफ करते-करते AAP के कार्यकर्ताओं का मन ही मैला हो जाएगा इसका एहसास न था सोनी को।

सोनी के पिता कहते हैं दो महीने से वो डिप्रेशन में थी। केजरीवाल से लेकर आशीष खेतान तक उसने अपनी फरियाद पहुंचाई। फरियाद क्या वो एक घुटन थी सोनी की जिसे उसने पार्टी के शीर्षस्थ नेता तक को बताया था। उसने कहा था कि AAP कार्यकर्ता रमेश भारद्वाज जो खुद को नरेला से AAP के विधायक शरद चौहान का करीबी बताता है उससे उसका शरीर मांग रहा है। सोनी ने अपने रिकॉर्डेड बयान में कहा है कि रमेश भारद्वाज ने कहा कि अगर राजनीति में उपर चढ़ना तो पहले बिस्तर पर गिरना होगा। जो उपरी पायदान पर पहुंच चुके हैं उनके साथ हमबिस्तर होना होगा। कई मौकों पर रमेश भारद्वाज ने सोनी को गलत तरीके से छुआ। इसी को तो यौन उत्पीड़न कहते हैं। इसके बारे में तो केजरीवाल भी जानते होंगे। आप तो ये भी जानते होंगे कि मरते- मरते सोनी ने एकबार फिर रमेश भारद्वाज का नाम लिया। लेकिन इसके बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा AAP को।

बीजेपी बुधवार को दिनभर AAP से सवाल पूछती रही। सोनी की खुदकुशी पर पार्टी का रुख जानना चाहती थी बीजेपी। लेकिन कोई सामने नहीं आया AAP की तरफ से।

संसद के भीतर दलित मुद्दे पर लंबी बहस चली। यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसपर AAP के आशुतोष ने तड़ाक ट्वीट ठोंक दिया कि बीजेपी के एंटी दलित होने का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है? बोलना चाहिए, राजनीति में मौके पर वार करना चाहिए। लेकिन सोनी पर AAP की खामोशी की क्या वजह है? ये सवाल सभी को हैरान कर रही है। जिस कीचड़ को साफ करने चार साल पहले AAP राजनीति में आई थी कहीं राजनीति के उस कीचड़ ने आपके बागीचे के फूल को सड़ा-गला तो नहीं दिया है।

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