नोट बदलने के बाद उंगली पर स्याही लगाने से किसने किया मना?

नई दिल्ली: बैंकों में कैश बदलवाने में गड़बड़ी की खबर सरकार को मिली। जिसके बाद सरकार ने नोट बदलवाने वाले की उंगली पर स्याही लगाने का आदेश बैंकों को जारी कर दिया। ये वही स्याही थी जिसका इस्तेमाल मतदान के बाद किया जाता है। लेकिन पहले ही दिन सरकार के इस आदेश की हवा निकलती दिखाई दी।

वजह ये थी कई बैंकों में स्याही का स्टॉक पहुंचा ही नहीं। केवल एसबीआई की शाखाओं पर लोगों की उंगली में नोट बदलवाने के बाद स्याही के निशान लगाए जा रहे थे। कई बैंकों में निशान लगाने के लिए मार्कर का इस्तेमाल किया जा रहा था। नतीजा ये हुआ कि लोग इस निशान को आसानी से छुड़ा लेते थे। और दोबारा लाइन में लग जाते थे। जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया।

नोट बदलने के बाद स्याही लगाने की शुरुआत हुई तो चुनाव आयोग नाराज हो गया। चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि लोगों की बाएं हाथ की तर्जनी उंगली पर स्याही न लगाई जाए। इससे हाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव और उप चुनाव में दिक्कत आ सकती है। चुनाव आयोग का कहना था कि अगर सभी लोगों की उंगली पर स्याही लग जाएगी तो हो सकता है चुनाव आने तक उसके निशान न छूटें। ऐसे में जब वो वोट डालने जाएंगे तो उन्हें दिक्कत होगी। दरअसल चुनाव में बार बार वोट डालने से रोकने के लिए स्याही लगाई जाती है।

चुनाव में इस्तेमाल होनेवाली स्याही देश में केवल एक ही जगह कर्नाटक के मैसूर में बनती है। 1962 यानि तीसरी लोकसभा से चुनाव में इस स्याही का इस्तेमाल शुरु हुआ। मैसूर के पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड की तरफ से तैयार इस तरह की स्याही का इस्तेमाल केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होता है। थाइलैंड, सिंगापुर, नाइजीरिया, मलेशिया में इस स्याही का निर्यात किया जाता है। इस स्याही को बनाने का काम बेहद ही गोपनीय तरीके से किया जाता है। एक बार उंगली पर लगने के बाद कम से कम 20 दिनों तक इसे छुड़ाया नहीं जा सकता।

इस स्याही की 5 मिलीलीटर की बोतल की कीमत 116 रुपये बैठती है। सरकार ने कंपनी को तकरीबन तीन लाख बोतल तैयार करने का ऑर्डर दिया है। जिसपर तकरीबन 3 करोड़ 37 लाख का खर्च आएगा।

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