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बिहार सरकार के शराबबंदी कानून में पहले क्या था और नया क्या है?

बिहार सरकार के शराबबंदी कानून में पहले क्या था और नया क्या है?

पटना: बिहार सरकार बिहार को शराब मुक्त बनाने के लिए शराबबंदी कानून लागू कर चुकी है। लेकिन सरकार के रास्ते की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई है। क्योंकि सरकार ने जिस अधिसूचना को 5 अप्रैल को जारी किया था उसे पटना हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। जिसके बाद बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

इस बीच 2 अक्टूबर को बिहार सरकार एक नया शराबबंदी कानून लेकर आई और उसे राज्य में लागू किया। लेकिन इस नए शराबबंदी कानून को भी पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मतलब ये कि अब सरकार को दोनों शराबबंदी कानून अदालत की कसौटी पर परखा जाएगा। सरकार को अपनी दलील से अदालत को ये भरोसा दिलाना होगा कि उसका फैसला जनहित में है और उसमें कोई खोट नहीं है।

सजा का कड़ा प्रावधान
नियम के मुताबिक शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने पर 10 साल से आजीवन कारावास, 1-10 लाख तक जुर्माना का प्रावधान है
नशे की हालत में पाए जाने पर 7 साल तक की सजा और 1-10 लाख तक का जुर्माना
शराब के नशे में अपराध या हिंसा करने पर 10 साल से आजीवन कैद और 1-10 लाख तक का जुर्माना
किसी परिसर या घर में शराब बरामद होने, इस्तेमाल करने, बिक्री- वितरण करने पर 18 साल से अधिक यानि परिवार के सभी बालिग सदस्य तबतक अपराध में शामिल माने जाएंगे जबतक वे खुद को निर्देष साबित न कर दें।

जहरीली शराब पर भी सख्त प्रावधान
जहरीली शराब से मौत होने पर उसे बनाने वाले को मृत्युदंड या आजीवन कारावास और 10 लाख तक जुर्माना
जहरीली शराब से दिव्यांग होने पर उसे बनाने वाले को 10 वर्ष से आजीवन कारावास की सजा और 2-10 लाख तक जुर्माना
जहरीली शराब पीने पर आंशिक बीमार होने पर बनानेवाले को 8 वर्षों से आजीवन कारावास तक की सजा और 1-10 लाख तक का जुर्माना
लेकिन अगर जहरीली शराब से कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन बनाते हुए कोई पकड़ा जाता है तो भी उसे 8-10 साल तक की सजा और 1-5 लाख तक का जुर्माना देना होगा

शराब का कारोबार करने पर सजा
छिपे तरीके से शराब का कारोबार करने पर 10 साल से आजीवन कारावास तक की सजा और 1-10 लाख तक का जुर्माना भरना होगा
अवैध तरीके से शराब का भंडारण करने पर 8-10 वर्षों तक की सजा और 10 लाख तक जुर्माना
अवैध शराब के कारोबार में महिला या बच्चों को शामिल करने पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास और 1-10 लाख तक जुर्माना देना होगा
किसी गाड़ी या दूसरे साधन से शराब ले जाते हुए पकड़े जाने पर बिना वारंट गिरफ्तारी होगी, और इसकी जानकारी डीएम को देनी होगी

नियम तोड़ने पर कैसी सजा होगी?
शराबबंदी कानून की अनदेखी और एक बार सजा काटने के बाद दूसरी बार फिर से वही अपराध करते हुए कोई पकड़ा जाएगा तो उसे पहले से दोगुनी सजा दी जाएगी कोई गांव-शहर या किसी खास इलाके में समूह या समुदाय बार-बार शराबबंदी कानून के उल्लंघन में शामिल रहता है तो डीएम के आदेश पर उस गांव, शहर या इलाके के लोगों को पहले अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर डीएम उनकी बातों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो उसपर सामूहिक जुर्माना लगेगा।

दोषी अफसर भी नहीं बच सकेंगे
पुलिस या संबंधित अधिकारी अपने कानूनी शक्तियों के बाहर जाकर किसी की तलाशी या गिरफ्तारी करते हैं तो उन्हें तीन साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अपनी जिम्मेदारी निभाने में चूकनेवाले अधिकारियों को तीन महीने तक की सजा और 10 हजार तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। छापेमारी करनेवाले उत्पाद अधिकारी पर हमला, उनके काम में बाधा उत्पन्न करने पर 8-10 साल की सजा और 10 लाख तक जुर्माना लग सकता है। अगर कोई हिस्ट्री शीटर या पेशेवर अपराधी इस तरह के अपराध कर रहा है या लोगों को ऐसा करने के लिए उकसाता है तो उसे उस इलाके से 6 महीने से 2 साल तक तड़ीपार किया जा सकता है। लेकिन ऐसा करने से पहले उसे डीएम के सामने अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

सरकार के नए कानून में क्या है खास?

  • किसी घर या परिसर में शराब पाए जाने पर केवल मालिक ही नहीं बल्कि घर के सभी वयस्क सदस्य गिरफ्तार होंगे
  • शराबबंदी कानून तोड़ने पर आरोपी की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है
  • इस अधिनियम के तहत दर्ज सभी अपराध गैर जमानती होंगे। शराब रखना भी गैर जमानती अपराध होगा
  • शराब ले जाने के लिए इस्तेमाल होनेवाले जानवर या वाहन को जब्त किया जाएगा
  • शराबबंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई केवल स्पेशल सेशंस कोर्ट में होगी। पहले किसी भी मजिस्ट्रेट कोर्ट में इसकी सुनवाई हो सकती थी
  • अगर कोई दोबारा शराबबंदी का कानून तोड़ने का दोषी होता है तो उसे पहले से दोगुनी सजा काटनी होगी
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