जब देश में इमरजेंसी लगी थी तब क्या कर रहे थे नरेंद्र मोदी, जानिये

नई दिल्ली:  देश में 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जो आपातकाल लगाया था उसे 43 साल पूरे हो चुके हैं। तकरीबन 19 महीने तक चले आपातकाल में तमाम बड़े नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। समाचार पत्र से लेकर फिल्म तक पर पाबंदी लगा दी गई थी। बिना इजाजत के ना तो किसी समाचार को प्रकाशित किया जा सकता था और ना ही कोई फिल्म रिलीज की जा सकती थी।

जिस वक्त आपातकाल लगा था तब पीएम मोदी क्या कर रहे थे। ये वो सवाल है जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता था। अपने भाषणों में पीएम मोदी ने कई बार आपातकाल का जिक्र किया है। पीएम की वेबसाइट narendramodi.in पर आपातकाल के वक्त के कुछ किस्से बताए गए हैं।

आपातकाल में सभी नेताओं का ठिकाना जेल बन चुका था। लेकिन इंदिरा की तरफ लगाई इमरजेंसी के दौर में भी आरएसएस पूरी तरह से सक्रिय था और अंडरग्राउंड रहकर काम कर रहा था। जिस तरह से आरएसएस के दूसरे प्रचारकों को अलग अलग जिम्मदारी दी गई थी उसी तरह से तब नरेंद्र मोदी को भी आंदोलन, सम्मेलन, बैठकों, साहित्य से जुड़े पर्चे बांटने का काम सौंपा गया था।

उस वक्त नरेंद्र मोदी नाथाभाई जगदा और वसंत गजेंद्र के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। इमरजेंसी में आरएसएस पर भी बैन लगा था और कई संघ प्रचारकों को गिरफ्तार कर लिया गया। इमरजेंसी में जब दमन का दौर चल रहा था तब नरेंद्र मोदी भेष बदलकर संघ के लिए काम कर रहे थे।

आरएसएस के वरिष्ठ व्यक्ति नाथा लाल जागडा को उन्होंने स्कूटर पर ले जा कर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया। उस दौर में सूचना प्रसारण पूरी तरह से बंद था। लेकिन मोदी ने संविधान, कानून, कांग्रेस सरकार की ज्यादतियों से जुड़ी साहित्य को गुजरात से दूसरे राज्यों में जानेवीली ट्रेन में रखवाई।

पीएम मोदी की वेबसाइट में बताया गया है कि वो अकसर भेष बदलकर जेल जाया करते थे। जबकि उन्हें बराबर गिरफ्तारी का खतरा था। जेल में बंद नेताओं तक जानकारी पहुंचाने का अहम और जोखिम भरा काम नरेंद्र मोदी करते थे।

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