DDCA में कैसे खेला गया गडड़बड़ का खेल

DDCA में कैसे खेला गया गडड़बड़ का खेल

अपने प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई की छापेमारी के बाद जब मंगलवार शाम को केजरीवाल सामने आए तो उन्होंने अरुण जेटली पर डीडीसीए में हुए भ्रष्टाचार के मामले में सवाल उठाए थे। ऐसा पहली बार नहीं है कि DDCA की गड़बड़ी पहली बार सामने आई है। जिस तरह की रिपोर्ट सामने आती रही है उससे तो यही  जाहिर होता है कि ये गड़बड़ी न्यूक्लियर चेन रिएक्शन की तरह है। जो जिसे कई दौर में सुनियोजित तरीके से किया गया। उस गड़बड़ी का साक्ष्य समेत पता लगाने के लिए केजरीवाल सरकार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। जिस गड़बड़ी की बात हो रही है दरअसल वो दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम को सजाने संवारने में किया गया। जिसमें ये संदेह जताया जा रहा है कि फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का कायाकल्प करने के लिए करोड़ों रुपये का ठेका ऐसी कंपनी को दिया गया जो जमीन पर कहीं है ही नहीं। पूर्व खिलाड़ी जैसे वीरेंद्र सहवाग, कीर्ती आजाद और बिशन सिंह बेदी की तरफ से आए दिन गड़बड़ी की बातें कही जाती रही हैं।

DDCA में कैसे हुआ करोड़ों का खेल?

2003 के मई महीने में DDCA ने एक टेंडर निकाला। जिसका काम इंजीनियर्स प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड यानि EPIL को दिया गया। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2004 में पूरा किया गया। जिसकी कीमत बैठी 24 करोड़ रुपये। जिसके बाद DDCA की तरफ से स्टेडियम में कुछ और काम जैसे स्टैंड में अतिरिक्त टीयर, कॉर्पोरेट बॉक्स का निर्माण, पुराने पवेलियन की मरम्मत का काम इस काम। 15 दिसंबर 2008 में इस काम को सरकारी कंपनी की तरफ से 58 करोड़ की  लागत से पूरा किया गया। यहीं से फिरोजशाह कोटला में शुर हुई गड़बड़ी। हलांकी स्टेडियम में काम पूरा होने मे चार साल की देरी हुई। इसके बाद कुछ और कामों के लिए ठेके दिये गए। जिसमें बिजली का काम, स्टेडियम के भीतर रंग रोगन फर्नीचर वगैरह तैयार करने का काम और जेनरेटर लगाने का काम था। DDCA के दस्तावेजों के मुताबिक 2012 तक फिरोज शाह कोटला स्टेडियम पर 114 करोड़ रुपया खर्च किया गया। जबकि और 30 करोड़ का भुगतान 2012-2015 के बीच उन कंपनियों को किया गया जिन्होंने स्टेडियम में या तो कुछ काम ही नहीं किया था या अगर किया भी था तो नाम मात्र का। लेकिन उसके बदले उन कंपनियों को भारी भरकम रकम का भुगतान किया गया DDCA की तरफ से। यहीं पर ये सवाल भी उठता है कि जिस स्टेडियम को सजाने संवारने का काम 24 से शुरु हुआ था वो रकम 145 करोड़ तक कैसे पहुंच गया।

फिरोजशाह कोटला स्टेडियम को तैयार करने में बेनामी कंपनी !

हलांकी दस्तावेज बताते हैं कि फिरोज शाह कोटला के मरम्मत का ज्यादा काम सरकारी ठेकेदार जैसे EPILकी तरफ से पूरा किया गया। लेकिन DDCA ने कुछ काम का ठेका प्राइवेट कंपनियों को भी दिया। उन्हीं कंपनी में शामिल हैं कैशनिक बिल्डकास्ट प्राइवेट लिमिटेड इसी से जुड़ी एक और कंपनी है कौशनिक फैब। इन दोनों कंपनियों को 11 करोड़ रुपये दिये गए केवल डाटा केबलिंग और इंटीरियर वर्क के लिए। DDCA  की तरफ से आधिकारिक तौर पर 15 दिसंबर 2008 को स्टेडियम का काम पूरा होने की बात कही गई। लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि कौशनिक बिल्डकास्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी 29 जून 2009 को DDCAF से जुड़ी। जो स्टेडियम का काम खत्म होने से तकरीबन 6 महीने बाद की तारीख है। कंपनी केवल डीडीसीए के साथ जुड़ी ही नहीं उसे 11 करोड़ रुपये का ठेका भी दिया गया। सवाल ये उठता है कि अगर खुद डीडीसीए के आधिकारिक दस्तावेज  में ये बात दर्ज है कि 2008 में स्टेडियम का पूरा काम हो गया तो फिर 2009 में कंपनी को ठेका देने की नौबत क्यों आई। इस कंपनी के डायरेक्टर कौशनिक कुमार औऱ उनकी पत्नी निकिता विनोद ने कंपनी का पता ईस्ट दिल्ली का दिया है लेकिन उस पते पर  इस नाम की कोई कंपनी नहीं है। कौशनिक की तरह ही एक और कंपनी है रतन इंडस्ट्रीज लिमिटेड। इस कंपनी को 2012 में 1.5 करोड़ और उसके आगले साल 4.5 करोड़ रुपये दिये गए। खास बात ये है कि इस कंपनी के बारे में डीडीसीए प्रेसिडेंट स्नेह कुमार बंसल के सिवा किसी को पता नहीं। अब सवाल ये उठते हैं कि क्या इन कंपनियों के जरिये पैसा घूमकर उनतक पहुंचाए जा रहे थे जिनपर डीडीसीए में करोड़ों के वारे न्यारे करने के आरोप लग रहे हैं।

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