2018 में विवाह के लिए शुभ दिन, 62 दिन बजेगी शहनाई

नीरज झा/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  जनवरी में अस्त हुआ शुक्र तारा शनिवार को उदय हो गया। इसके साथ ही लंबे इंतजार के बाद फिर से शादी की शहनाइयां सहित अन्य मांगलिक कार्य का दौर फिर से शुरू हो  चुका है। गौरतलब है कि 17 दिसंबर को शुक्र तारा पूर्व में अस्त हुआ था। इससे पूर्व 16 दिसंबर को मलमास लग गया। ऐसे में पिछले डेढ़ माह से बंद पड़े सगाई, विवाह, प्रतिष्ठा, मुंडन, गृहारंभ, गृह प्रवेश सहित अन्य सभी मांगलिक अनुष्ठान हो जाएंगे। इसके चलते बाजार में भी रौनक बनी हुई है। आचार्य सुमन मिश्रा ने बताया कि वैवाहिक कार्यक्रम में शुक्र बल आवश्यक रूप से देखा जाता है।  शुक्रोदय के साथ पहला सावा 4 फरवरी से शुरू हुआ।

गत वर्ष 2017 में 10 दिसंबर को आखिरी विवाह मुहूर्त था। पिछले दिनों मकर संक्रांति पर गुरु ग्रह के अस्त रहने पर विवाह मुहूर्त नहीं थे।  अब शुक्र ग्रह अस्त है जो 6 फरवरी की शाम को उदित हुआ और इसके अगले दिन 7 फरवरी से मुहूर्त शुरू हो चुके हैं। करीब दो माह के अंतराल के बाद 7 फरवरी से विवाह मुहूर्त शुरू हुए हैं।  इस पूरे वर्ष में मुहूर्त केवल 62 दिन ही रहेंगे। अभी ये मुहूर्त 16 जुलाई तक रहेंगे। अगस्त से नवंबर माह तक मुहूर्त नहीं होने से विवाह नहीं होंगे, फिर वे 8 दिसंबर से शुरू होंगे। सर्वाधिक विवाह समारोह 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर होंगे। 21 जुलाई को भड़ली नवमी पर मुहूर्त नहीं रहेगा, परंतु इस दिन की शुभता के कारण विवाह किए जा सकेंगे।
विवाह के लिए शुभ हैं ये तिथियां
13 फरवरी को प्रदोष व शिवरात्रि, 19 को विनायकी चतुर्थी, 13 मार्च को पाप मोचिनी एकादशी, 18 अप्रैल अक्षय तृतीया, 24 को जानकी नवमी, 26 को मोहिनी एकादशी, 13 मई शिव चतुर्दशी, 25 जून वट सावित्री व्रत व प्रदोष, 9 जुलाई योगिनी एकादशी व 11 दिसंबर विनायकी चतुर्दशी।
23 फरवरी से एक मार्च तक विवाह नहीं होंगे
23 फरवरी से एक मार्च तक होलाष्टक के चलते विवाह नहीं किए जाएंगे। इसी दिन शाम से मुहूर्त प्रारंभ होंगे, जो 16 जुलाई तक रहेंगे। अगस्त से नवंबर तक कई बार गुरु व शुक्र के अस्त रहने, सूर्य के कर्क, तुला व वृश्चिक आदि राशियों में रहने पर भी विवाह नहीं होंगे। देवउठनी ग्यारस 19 नवंबर को रहेगी। इस दिन विवाह मुहूर्त नहीं रहेगा। दिसंबर में केवल 4 दिन मुहूर्त रहेंगे।
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