बेटे की लाश जमीन पर पड़ी थी, एंबुलेंस ड्राइवर बोला 3 किलोमीटर के 2500 रु. दो,Video

नीरज झा/डेस्क

नई दिल्ली:  बेटे की मौत से बेहाल पिता जिनके कांधे का सहारा नहीं रहा इस दुनिया में उस पिता पर कहर बरपा दिया एबुंलेस चालक ने। अवैध वसूली के लिए लगातार चर्चा मे रहने वाले सरकारी और निजी एबुंलेस एजेंसी  ऐसे लोगों को भी नहीं बख्शते हैं जिनके तन पर न तो पहनने को कपड़े हैं और न खाने को पैसा। अस्पतालों के एंबुलेस की मनमानी इन दिनों चरम सीमा पार कर गई है। अगर आप एबुंलेस किराये पर लेकर घर से अस्पताल और अस्पताल से घर जा रहे हैं तो आपको दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।

सरकार के द्वारा जो किराया का मापदंड है उसे एबुंलेस सर्विस  ठेंगे पर रखते हैं और आप आंसू बहाते रहिए कोई सुनने वाला नहीं है। उस समय उनके आंसू ये कहते हुए नजर आते हैं एंबुलेस गरीबों के लिए नहीं बाबुओं के लिए है। सरकारी तौर पर कई तरह की योजना चलाई जा रही है ताकि मरीज को अस्पताल पहुचने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो लेकिन मामला उल्टा असर होता दिख रहा है।  इस बदहाली कुव्यवस्था का पोल खोल एक वीडियो इस समय सोशल साइट पर बहुत तेजी से वाइरल हो रहा हैं जो अस्पताल के एबुंलेस व्यवस्था  को बताने के लिए काफी है।

विडियो बेंगलुरू में एक एस एल डब्ल्यू सर्विस के एबुंलेस गाड़ी नंबर KA05AF0254 की है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक पिता के बेटे की मौत  का सौदागर बनते नजर आ रहा है ये एंबुलेंस ड्राइवर। अस्पताल से 3 किलोमीटर दूरी का किराया 2500 चौंकिए मत। आपको देना पडेगा ये खुलेआम सौदेबाजी हो रही है, जिससे अस्पताल प्रबंधन बेखबर है। ऐसा नहीं प्रतीत होता है कही न कहीं उनकी भी मिलिभगत की भूमिका को उजागर करती है। चालक खुलेआम कह रहे हैं पैसा दो गाडी का नंबर नोट करो पुलिस को भी कमिशन देना पडता है मुझे। पुलिस जो बोलेगा मै देख लूंगा।  तुम मेरा कुछ न बिगाड़ सकता है।

बेंगलुरु के अस्पतालों में  हर चीज़ का पैसा लगता है सिक्योरीटी गार्ड गेट खोलने के भी 500 से 1000रूपये लेते हैं। यहा उस फटेहाल  पिता से  पोस्टमार्टम बिल 500 चुकाने के बाद भी डाक्टर को अलग से नजराना देते हैं जिसके बेटे के शव उसके आखों के सामने है। वो कुछ भी बोलने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। उनके बुढापे का सहारा छीना जा चुका है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग भी कहर ढाने मे कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। उनके बेटे की मौत पर पैसे की सोदेबाजी हो रही है।

ऐसे में एक युवक ने जब इस के लिए आवाज उठाई तो मारपीट पर उतारू हो गया एंबुलेस चालक। पैसे लेने के बाद बिल फाड़ कर चलने की कोशिश करते हैं सरेआम। इस तरह की घटना ये बताने के लिए काफी है अवैध वसूली को लेकर स्वास्थ्य विभाग न तो सख्त है न ही इसके पास किसी प्रकार की रणनीति हैं। ऐसे में गरीबों के लिए मददगार कौन हो सकते हैं कहना मुश्किल है। निजी एबुंलेस टैक्सी आपरेटर की तरह मनमानी किराया वसूल रही है और प्रशासन बेखबर है। आए दिन इस तरह की घटना होते रहती है ऐसे में  गरीबों को अपने हक हकूक के प्रति जागरूक न होना इस अवैध वसूली की कई ऐसी कुव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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