विजय रूपाणी ने ली सीएम पद की शपथ, ये चुनौतियां सामने खड़ी हैं

नई दिल्ली:  विजय रूपाणी ने दूसरी बार गुजरात के सीएम पद की शपथ ली है। रूपाणी के अलावे नितिन पटेल ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत एनडीए शासित 18 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। कई कैबिनेट मंत्री भी रूपाणी के शपथ ग्रहण में शामिल हुए। रुपाणी में दूसरी बार गुजरात की कमान संभाली है। इससे पहले आनंदी बेन पटेल के बाद उन्हें सीएम बनाया गया था।

इसबार रुपाणी के सामने कई चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी हैं। इसलिए पिछली बार के मुकाबले इसबार रुपाणी का कार्यकाल ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। इसकी एक वजह ये भी है कि इसबार जहां बीजेपी की सीट कम हुई है वहीं विपक्ष मजबूत बनकर उभरा है। आईये जानते हैं रूपणी के सामने क्या क्या चुनौतियां हैं।

ग्रामीण इलाकों में पार्टी को मजबूत करना

हाल में हुए चुनाव में ये बात सामने आई की ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है जबकि कांग्रेस मजबूत बनकर उपरी है। ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस की पकड़ कायम होना केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी सिरदर्द है। खासकर 2019 के दृष्टिकोण से ग्रामीण इलाकों में बदलता समीकरण काफी चिंताजनक है बीजेपी के लिए। इसलिए सीएम रुपाणी और डिप्टी सीएम नितिन पटेल के लिए ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को मजबूत करने की चुनौती होगी।

पटेलों को मनाने की चुनौती

पटेल आरक्षण का सवाल आज भी अपनी जगह कायम है। बल्कि यूं कहें ये पहले से ज्यादा गंभीर हो गया है। क्योंकि कई पाटीदार नेता कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें जीत मिली भी। यानि जिस पाटीदार आरक्षण की मांग सड़कों पर की जा रही थी अब सदन के भीतर भी सरकार के सामने वो पाटीदार नेता सवाल पूछने के लिए मौजूद रहेंगे। पटेल आरक्षण पर जल्द ही रूपाणी को कोई रास्ता निकालना होगा। क्योंकि 2019 आने में ज्यादा देर नहीं है।

2019 में 2014 वाला मैजिक दोहराने की चुनौती

2014 को लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने गुजरात की सभी 26 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन तब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे। लेकिन रूपाणी हैं। इसलिए उनके सामने 2014 वाले रिकॉर्ड को 2019 में दोहराने की चुनौती है। चुनौती गंभीर इसलिए है क्योंकि अब कांग्रेस पहले ज्यादा मजबूत होकर उभरी है। जबकि बीजेपी के विधायकों का नंबर कम हुआ है।

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