MLA, MP अगर काम नहीं करेंगे तो जनता उन्हें चुनाव के बाद भी हटा सकेगी!




नई दिल्ली: अगर सबकुछ ठीक रहा और देश के नेता गंभीरता से विचार करें तो जनता को काम नहीं करनेवाले सांसद और विधायकों को वापस बुलाने यानि ‘राइट टू रिकॉल’ का अधिकार होगा। लोकसभा में बीजेपी सांसद वरूण गांधी के इस निजी विधेयक पर विचार किया जाएगा जिसमें ये प्रस्ताव किया गया है कि किसी क्षेत्र के 75 फीसदी मतदाता अगर अपने सांसद और विधायक के काम से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें निर्वाचन के दो साल बाद वापस बुलाया जा सकेगा।

इस निजी विधेयक के बारे में बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने कहा कि अगर लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है तो उन्हें यह भी अधिकार होना चाहिए कि काम नहीं करने या गलत कामों में शामिल होने पर अपने प्रतिनिधि को वापस बुला लें।

इस विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने की प्रक्रिया उस क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या के एक चौथाई मतदाताओं के हस्ताक्षर के साथ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करके शुरु की जा सकती है। हस्ताक्षर की प्रमाणिकता की जांच करके लोकसभा अध्यक्ष उक्त याचिका को पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के पास भेजेंगे।

प्राइवेट मेंबर बिल के मुताबिक चुनाव आयोग हस्ताक्षरों की पुष्टि करेगा और सांसद या विधायक के क्षेत्र में 10 स्थानों पर मतदान कराएगा। अगर तीन चौथाई मत जन प्रतिनिधि को वापस बुलाने के लिए पड़े तब उक्त सदस्य को वापस बुलाया जाएगा। अधिवेशन में ये भी कहा गया है कि परिणाम प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर स्पीकर इसकी सार्वजनिक अधिसूचना जारी करेंगे और सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग उप चुनाव करा सकता है।

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