वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं ने उतारी राम की आरती, उलेमा बोले ये मुसलमान नहीं

नई दिल्ली:  दिवाली के दिन वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं ने भगवान राम की आरती उतारी और पूजा अर्चना की। लेकिन मुस्लिम महिलाओं की ये धर्मनिरपेक्ष कोशिश दारूल उलूम उलेमा को पसंद नहीं आया। दारूल उलूम के एक मौलाना ने बयान देते हुए कहा कि ये महिलाएं मुसलमान नहीं हैं। क्योंकि जो अल्लाह के सिवा किसी और की पूजा अर्चना करने वाले मुसलमान नहीं हो सकते हैं।

भगवान राम की आरती करने वाली महिलाओं के समूह की नेता नाजनीन अंसारी ने कहा अयोध्या हमारी जियारतगाह का नाम है। वहां इमाम एक हिंद श्रीराम रहते हैं। हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक भाईचारे में यकीन करने वाली नाजनीन का कहना है कि ऐसे त्यौहार से सामाजिक एकता और भाईचारा बढ़ता है। श्रीराम हमारे पूर्वज हैं। हम अपना नाम और धर्म बदल सकते हैं, लेकिन हम अपने पूर्वजों को कैसे बदल सकते हैं।

उन्होंने मौलाना की बात पर हैरानी जताते हुए कहा कि भगवान राम की पूजा से प्रेम और सद्भाव बढ़ता है साथ ही यह इस्लाम की उदारता भी दिखाता है।

मुस्लिम महिलाओं ने वाराणसी के वरुणानगरम कॉलोनी में भगवान राम की आरती उतारी थी और हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इसका आयोजन सामाजिक सौहार्द का संदेश देने के लिए किया गया था।

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