धर्म के चक्कर में फंसा लाउडस्पीकर, यूपी में धार्मिक स्थलों की पहचान शुरु

लखनऊ:  हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यूपी सरकार बिना इजाजत लाउडस्पीकर बजानेवाले धार्मिक स्थलों की पहचान कर रही है। हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए सरकार को आदेश दिया है कि बिना इजाजत लाउडस्पीकर बजानेवाले धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाएं। लेकिन सरकार की इस काम पर सियासत शुरु हो गई है।

कोर्ट के आदेश और सरकार की कार्रवाई पर शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है पहले मस्जिदों में लगे हुए लाउडस्पीकर को हटाएं। उसके बाद मंदिरों के लाउडस्पीकर को बंद कराया जाए। इस मामले पर मुस्लिम धर्मगुरु का कहना है कि सरकार अपनी कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के करे। यानि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े इस मामले ने अब सियासी रंग लेना शुरु कर दिया है।

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा कि बीजेपी को अपने निगेटिव अप्रोच से हट जाना चाहिए। वह पॉजिटिव अप्रोच रखें। जहां लगे हुए हैं उनकी परमिशन जारी कर दें और आगे से जो लगाएं वो परमिशन से लगाएं।

यूपी के प्रमुख गृह सचिव ने सभी जिलों के डीएम को 10 जनवरी तक ऐसे धार्मिक स्थल और लाउडस्पीकर की पहचान करने को कहा है  जो बिना इजाजत बजा रहे हैं। 15 जनवरी तक धार्मिक स्थलों को लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत प्रशासन से लेनी होगी। यानि 15 जनवरी के बाद से बिना इजाजत लाउडस्पीर बजाने वाले धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे।

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