यूपी में शिया वक्फ बोर्ड के 6 सदस्य हटाए गए, अखिलेश ने की थी नियुक्ति

लखनऊ:  यूपी में शिया वक्फ बोर्ड के 6 सदस्यों को यीगो सरकार ने हटा दिया है। जिन सदस्यों को हटाया गया है उनमें पूर्व राज्यसभा सांसद अख्तर हसन रिजवी, मुरादाबाद के सैय्यद वली हैदर, मुजफ्फरनगर की अफशा जैदी, बरेली के सैयद अजीम हुसैन, शासन में विशेष सचिव नजमुल हसन रिजवी और आलिमा जैदी शामिल हैं। उनको 2015 में अखिलेश सरकार ने नियुक्त किया था।

दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड में घोटाले की जांच की आंच सपा नेता आजम खान और उनकी पत्नी तक पहुंच सकती है। वक्फ बोर्ड की सीबीआई जांच में आजम खान और उनकी पत्नी भी आ सकती हैं। जौहर यूनिवर्सिटी में वक्फ की जमीन रजिस्ट्री कराने और प्रभाव का इस्तेमाल कर शत्रु संपत्ति को जौहर यूनिवर्सिटी में शामिल करने के मामले में सीबीआई आजम खान की भूमिका की जांच करेगी।

सेंट्रल वक्फ कमेटी ने भी आजम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर योगी सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिये हैं। वहीं वक्फ बोर्ड को भंग करने के नोटिस के बाद से हंगामा मच गया। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा है कि अगर सरकार ऐसा असंवैधानिक फैसला लेती है तो वह अदालत की शरण में जाएंगे।

राज्य में जब योगी सरकार बनी थी तो राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने लखनऊ में वक्फ बोर्ड के दफ्तर में औचक निरीक्षण किया था। लेकिन दफ्तर में बड़े अधिकारी से लेकर किरानी तक सभी गैर हाजिर थे। कार्यालय में इक्का दुक्का ही कर्मचारी मिले थे। इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने दोबारा उसी दफ्तर का निरीक्षण किया था। लेकिन तब भी हालात वही थे। दफ्तर में एसी पंखा तो चल रहा था लेकिन अधिकारी से लेकर दूसरे कर्मचारी तक गायब थे।

जिसके बाद मोहसिन रजा ने कहा था कि यहां कोई काम करता ही नहीं है। केवल बिजली और पैसों की बर्बादी की जा रही है। ऐसे में इस तरह के दफ्तर के होने का कोई औचित्य नहीं है। इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए।

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