समाजवादी पार्टी की साइकिल पर अखिलेश करेंगे सवारी या मुलायम चढ़ेंगे?




दिल्ली: समाजवादी पार्टी की जो लड़ाई अबतक लखनऊ में लड़ी जा रही थी वो लड़ाई अब दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर में पहुंच चुकी है। अब लड़ाई केवल सियासत तक सीमित नहीं है बल्कि अब लड़ाई इस बात की है कि पार्टी में सर्वोच्चता किसकी रहेगी। और पार्टी अब किसके नाम से जानी जाएगी।

1 जनवरी को अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और जो अबतक राष्ट्रीय अध्यक्ष थे यानि मुलायम सिंह यादाव उन्हें मार्गदर्शक बना दिया गया। शिवपाल यादव को सपा के यूपी अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया। इतना सबकुछ होने के बाद अब मुलायम और अखिलेश के बीच लड़ाई इस बात की है कि किसका समाजवाद असली है? क्योंकि जो असली समाजवादी होगा साइकिल उसी के पास रहेगी। फिलहाल साइकिल पर दोनों तरफ से जोर आजमाइश चल रही है।

मुलायम सिंह यादव सोमवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे। उनके साथ पार्टी के वकील और शिवपाल यादव भी थे। चुनाव आयोग के सामने इन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर उनका अधिकार है। क्योंकि वही पार्टी के मुखिया हैं। इसके जवाब में मंगलवार को अखिलेश खेमे की तरफ से रामगोपाल यादव चुनाव आयोग पहुंचेंगे। जानकारी के मुताबिक उनकी तरफ से भी पार्टी पर दावेदारी पेश की जाएगी।

रामगोपाल चुनाव आयोग के सामने ये बात कह सकते हैं कि जिस समाजवादी पार्टी की बात वो कर रहे हैं वही असली है। इसलिए समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह यानि साइकिल पर उनका अधिकार है। इस सब के बीच मुलायम सिंह यादव इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट जाने का मन भी बना रहे हैं।

क्योंकि सोमवार को जब मुलायम लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्होंने ये भी संकेत दिये थे कि इस मामले में कानूनी सलाह ली जाएगी। इसका मतलब साफ है कि भले ही साइकिल पर अखिलेश दावा कर रहे हैं जो उनके बेटे हैं लेकिन मुलायम इतनी आसानी से साइकिल को छोड़ने वाले नहीं है।

जाहिर है अगर चुनाव आयोग में बात नहीं बनती है तो हो सकता है मुलायम सुप्रीम कोर्ट में साइकिल की दावेदारी पेश करेंगे।

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