यूपी में जीत के बाद मायावती से मिले अखिलेश, जानिये घंटे भर में क्या हुई बात

लखनऊ:  यूपी में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत का श्रेय बीएसपी सुप्रीमो मायावती को काफी हद तक जाता है। क्योंकि उनके समर्थन के बिना 29 साल तक योगी की छत्र छाया में रहे गोरखपुर लोकसभा में साइकिल दौड़ा पाना संभव नहीं था। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सपा और बसपा अलग अलग होकर इससे पहले भी कई चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन योगी का मठ नहीं जीत सके थे। योगी के मठ में बसे मतदाताओं के मन को गठबंधन की तरफ मोड़ना तब संभव हुआ जब मायावती और अखिलेश साथ आए।

मायावती के इसी समर्थन का शुकराना अदा करने अखिलेश यादव बुधवार शाम के तकरीबन साढ़े सात बजे बीएसपी सुप्रीमो मायावती के पास पहुंचे थे। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक अभिवादन हुआ उसके बाद मायावती और अखिलेश मायावती के बैठक में बातें करने लगे। जिस कमरे में ये दोनों नेता मौजूद थे वहां अखिलेश यादव के साथ संजय सेठ और मायावती के साथ सतीश चंद्र मिश्रा मौजूद थे।

जिस तरह से इस उपचुनाव में अखिलेश और मायावती पुरानी अदावत भुलाकर साथ आए हैं उसमें राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने बड़ी भूमिका निभाई है। संजय सेठ समाजवादी पार्टी से राज्य सभा सांसद हैं। और इन दोनों नेताओं को साथ लाने में इन्होंने अहम भूमिका निभाई।

माया और अखिलेश की ये मुलाकात तकरीबन 1 घंटे चली। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने इस जीत पर एक दूसरे को बधाई दी। सूत्रों के मुताबिक उसके बाद दोनों नेताओं ने उस संजीवनी बूटी की तलाश पर चर्चा की जिससे कि इस गठबंधन को 2019 तक बढ़ाया जा सके। हलांकि अभी दोनों खेमे में से कोई भी कीसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं।

इस जीत के बाद अखिलेश से भी यही सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या उनका ये गठबंधन 2019 में भी कायम रहेगा या फिर उपचुनाव में जीत के साथ ही इस गठबंधन की आयु भी पूरी हो गई। इस सवाल के जवाब में अखिलेश कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। पिछले दिनों जब मायावती ने उपचुनाव में गठबंधन की बात कही थी तो उन्होंने ये भी साफ कर दिया था कि ये साथ कवल उपचुनाव के लिए है। इसके दूसरे मायने नहीं निकाले जाएं। लेकिन ये तब की बात है जब नतीजे नहीं आए थे। और गोरखपुर और फूलपुर की जीत एक निश्चित फासले पर थी। लेकिन अब राजनीतिक परिदृश्य बदल चुके हैं। अब समाजवादी पार्टी उपचुनाव जीत चुकी है।

1993 में मुलायम और कांशीराम की मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच ये पहली मुलाकात है। क्योंकि 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद से दोनों दलों के बीच जो दूरी आई थी उस खाई की गहराई हर बीतते साल के साथ बढ़ती गई थी। लेकिन अब नई पीढ़ी एक नए नजरिये के साथ सोच रही है। और जो काम मुलायम युग में नहीं हो पाया उसे अखिलेश युग में साधने की कोशिश की जा रही है।

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