7वें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारी खुश नहीं, महा-हड़ताल की चेतावनी

केंद्र सरकार खुश थी की उसने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देकर 23 फीसदी वेतन वृद्धि कर दी। यानि अब सभी केंद्रीय कर्मचरियों के अच्छे दिन आ गए। केंद्रीय कैबिनेट ने जब सिफारिश को मंजूरी दी तो दिल्ली के आसमान में दोपहर का सूरज चकाचक चमक रहा था। लेकिन जैसे ही सूरज का अस्त हुआ कर्मचारी यूनियन को केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन वृद्धि में किये गए आंकड़ों के खेल पता चल गया। और लगे हाथ सभी केंद्रीय विभागों के कर्मचारियों का संगठन नेशनल ज्वाइंड काउंसिल ऑफ एक्शन की तरफ से नाराजगी जाहिर कर दी गई।

यूनियन की तरफ से कहा गया है कि 7 वेतन आयोग की सिफारिशों से वो खुश नहीं हैं। नेशनल ज्वाइंड काउंसिल ऑफ एक्शन की तरफ कहा गया है कि इस वेतन आयोग पर पहले ही आपत्ति जताई गई थी। इसके बावजूद सरकार ने बिना बदलाव के इसे लागू कर दिया। इस वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18 हजार करने की सिफारिश है। जबकि इसे 26 हजार किया जाना चाहिए था। यूनियन की तरफ से ये भी कहा जा रहा है कि तकनीकी तौर पर केवल 14 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। जिसमें सभी अलाउंस को जोड़ कर 23 फीसदी बताया गया। यूनियन का कहना है कि छठे वेतन आयोग ने 52 फीसदी और 5वें वेतन आयोग ने 40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। यूनियन के मुताबिक नई पेंशन नीति को हटाकर पुरानी पेंशन नीति लागू करने और न्यूनतम वेतन 26 हजार करने की मांग की गई थी। लेकिन सरकार ने उस मांग को नजरअंदाज कर दिया।

बड़े हड़ताल की चेतावनी
सरकार की तरफ से हुई इस अनदेखी के बाद अब यूनियन 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ 11 जुलाई से देशव्यापी बेमियादी हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। इस हड़ताल में सभी केंद्रीय विभागों के 32 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। यूनियन का कहना है कि आम जनता को वो परेशान नहीं करना चाहते। लेकिन अगर मांग नहीं मानी गई तो जनता को होनेवाली परेशानी की जिम्मेदार सरकार होगी। केंद्रीय कर्मचारियों की इस मांग और हड़ताल की धमकी पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर से ज्यादा सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों को दी जाती है।
-7th Pay Commission, National Joint Council of Action, NJCA

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