मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे हैं ट्रिपल तलाक के विधेयक का विरोध?

मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे हैं ट्रिपल तलाक के विधेयक का विरोध?

नई दिल्ली:  इंस्टेंट तीन तलाक पहले ही असंवैधानिक हो चुका है। अब उसपर कानून बनाने की बारी है। आज इस दिशा में एक कदम बढ़ा दिया गया। संसद में तीन तलाक का बिल पेश किया जाएगा। जिसके बाद ये कानून की शक्ल ले लेगा। बिल में इंस्टेंट तलाक देने वाले के लिए तीन साल की सजा का प्रावधान है।

सरकार जिस विधेयक को संसद में लेकर आ रही है पर्सनल लॉ  बोर्ड उसपर आपत्ति जता रहा है, उसका कहना है

  1. तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट अवैध ठहरा चुका है। यानि अगर तीन तलाक माना ही नहीं जाएगा तो सजा किस बात की दी जाएगी।
  2. ट्रिपल तलाक के साथ सरकार अन्य प्रावधानों को भी खत्म करना चाहती है। तलाक का अधिकार मुस्लिम पुरुषों को शरियत से मिला है। सरकार इस अधिकार को कैस छीन सकती है।
  3. तलाक सिविल एक्ट का मामला है। जिसे सरकार बिल के जरिये क्रिमिनल एक्ट बना रही है। अगर ऐसा हुआ तो क्या तलाक के बाद पति-पत्नी के बीच सुलह की गुंजाइश खत्म नहीं हो जाएगी।
  4. सरकार इस बिल के जरिये इस्लामिक शरियत में दखलअंदाजी करना चाहती है। संविधान से मुस्लिम समुदाय को अपने धर्म के हिसाब से जीने का अधिकार मिला है। क्या ये विधायक मुस्लिमों की धार्मिक और संवैधानिक अधिकार का हनन नहीं है।
  5. सरकार मुस्लिमों के लिए बिल ला रही है लेकिन मुस्लिमों के किसी पक्षकार से उसने बात नहीं की। बिना उनके विचार जाने सरकार उनके लिए कानून कैसे बना सकती है।
  6. बिल में बच्चों की कस्टडी का भी प्रावधान है। बच्चे मां के पास रहेंगे। इससे गरीब परिवारों पर बोझ बढ़ेगा। जो महिलाएं बच्चों को साथ नहीं रखना चाहती। उन्हें मजबूरन बच्चा रखना पड़ेगा।
  7. तीन तलाक देकर जब पति जेल चला जाएगा तो पत्नी को गुजारा भत्ता और कौन देगा।
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