शिवलिंग पर भूल कर भी इन चीजों को ना चढ़ाएं, ऐसा करने पर होगा अपशकुन




नई दिल्ली: शिवरात्री के मौके पर मंदिरों में भक्तों भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना में लगे हुए हैं। शास्त्रों के अनुसान दूसरे देवों के अपेक्षा भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। यही वजह है कि इन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। यही नहीं भोलेनाथ अपने भोले स्वभाव की वजह से भक्तों की छोटी मोटी गलतियों को भी माफ कर देते हैं। लेकिन भेलेनाथ के भक्तों के लिए ये जानना जरुरी है कि शिवलिंग पर जब आप पूजन सामग्री चढ़ाएं तो उनमें वो कौन सी चीजें हैं जिन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।

  1. शंख का प्रयोग हर पूजा में किया जाता है। इसका प्रयोग काफी पवित्र भी माना जाता है। लेकिन इसका प्रयोग शिवलिंग पर जल चढ़ाने में नहीं किया जाना चाहिए।
  2. भोलेनाथ पर जल चढ़ाने में कांसा, पीतल या अष्टधातु से बने पात्र से जल चढ़ाना चाहिए। भोलेनाथ पर स्टील या लोहे से बने बर्तन से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  3. शंख की तरह ही तुलसी का प्रयोग भी हर पूजा में किया जाता है। लेकिन शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना भी वर्जित है। जो लोग भागवान शिव की पूजा में तुलसी चढ़ाते हैं उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती है।
  4. भगवान शिव को हल्दी भी नहीं चढ़ाई जाती। क्योंकि हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग की जाती है। और शास्त्रों के अनुसार शिव पुरुषत्व के प्रतीक हैं। इसिलिए शिवलिंग पर हल्दी गलती से भी नहीं चढ़ाएं।
  5. भोलेनाथ को लाल रंग के फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं। उन्हें केतकी और केवड़े के पुष्प भी नहीं चढ़ाए जाते हैं। भगवान शिव को सफेद रंग के फूल चढ़ाने चाहिए। जिसमें धतूरा का फूल और फल भी शामिल है। इससे भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।
  6. शिव की पूजा में नारियल का प्रयोग तो होता है लेकिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शिवलिंग पर चढ़ाई जानेवाली सारी चीजें निर्मल होनी चाहिए।
  7. भगवान शिव की पूजा चंदन से की जाती है।
  8. शिव की पूजा करने में सिंदूर या कुमकुम का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  9. एक और भी वजह है महिलाएं सिंदूर या कुमकुम पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं। लेकिन भगवान शिव विध्वंशक के रूप में माने जाते हैं। यही वजह है कि शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए।
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