TMC सांसद ने ही ममता बनर्जी पर उठाए सवाल

TMC सांसद ने ही ममता बनर्जी पर उठाए सवाल

  • दिनेश त्रिवेदी का ईशारा किस तरफ है?
  • TMC ने अपने ही सांसद को प्रचार से दूर क्यों रखा ?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस यानि TMC अपनी दूसरी पारी को शुरु करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। विरोधी ममता के शासन को नाकाम बता चुके हैं। लेकिन उन आरोपों को ममता खारिज कर आगे बढ़ने और अपने शासनकाल का पार्ट 2 शुरु करने का दावा कर रही हैं। जबतक विरोधी निशाना साधते थे तो उसे TMC साजिश करार दे रही थी। लेकिन जब अपने ही अपनों पर सवाल उठाने लगें तो जवाब देना मुश्किल हो जाता है। उन्हीं अपने में से एक हैं पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से टीएमसी सांसद दिनेश त्रिवेदी। इसबार विधानसभा चुनाव में दिनेश त्रिवेदी  को चुनाव प्रचार से दूर रखा गया है। अबतक उनकी एक भी रैली किसी भी इलाके में नहीं हुई है। औऱ होने की उम्मीद भी नहीं है। यानि कहा जा सकता है कि पार्टी ने अपने सांसद दिनेश त्रिवेदी को हाशिये पर डाल दिया है। इस तरह से दरकिनार किये जाने से नाराजगी दिनेश त्रिवेदे के मन में भी है। यही वजह है कि बगैर नाम लिये ममता बनर्जी पर ही निशाना साध दिया। जिसमें उन्होंने कहा की गंगा तबतक साफ नहीं हो सकती जबतक गंगोत्री की सफाई नहीं होती है। इस गंगा औऱ गंगोत्री का मतलब काफी गंभीर है।

गंगा और गंगोत्री का क्या मतलब है?

एक बार फिर साफ कर दूं की दिनेश त्रिवेदी ने ममता बनर्जी या पार्टी का कहीं नाम नहीं लिया। लेकिन इशारा कुछ इस तरह से किया की समझनेवाले समझ गए। अब ये समझ लीजिये उन्हों गंगा और गंगोत्री का उदाहरण क्यों दिया। दरअसल गंगा का मतलब यहां पश्चिम बंगाल की शासन व्यवस्था औऱ ब्यूरोक्रेसी है जबकि गंगोत्री मतलब खुद ममता बनर्जी हैं। जिनपर शारदा घोटाले का दाग इस कदर लगा है कि उससे चाहकर भी वो आजाद नहीं हो पा रही हैं। दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि ‘पार्टी ने मुझे विधानसभा चुनाव में प्रचार नहीं करने दिया। मैं आम आदमी के दिमाग की बात कर रहा हूं। अब वक्त बदल चुका है। जनता मूर्ख नहीं है। लोग सबकुछ जानते हैं। इसलिए मैं वही करुंगा जो सही होगा। सवाल ये है कि हम एक नागरिक और नेता के तौर पर क्या देखते हैं महसूस करते हैं? हमारा राष्ट्र एक खूबसूरत देश है, लेकिन ब्यूरोक्रेसी और राजनीति ऐसी नहीं है। ईमानदार लोग शांति से जीवन नहीं जी सकते।‘

दिनेश त्रिवेदी की ये नाराजगी केवल विधानसभा चुनाव में प्रचार से रोकने की वजह से नहीं है। कभी TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बेहद खास रहे दिनेश त्रिवेदी और ममता बनर्जी के बीच चल रही खटपट तब सामने आई थी जब वो यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। किराय बढ़ाने को लेकर पार्टी और मंत्री की सोच अलग-अलग थी। लड़ाई तब और बढ़ गई थी जब ममता के कहने के बावजूद पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने बढ़ा किराया वापस लेने से इनकार कर दिया था। नतीजा ये हुआ की ममता बनर्जी ने रेल मंत्री ही बदल दिया। उसी वक्त से दिनेश त्रिवेदी पार्टी में हाशिये पर चल रहे हैं। आज कहने को वो TMC के सांसद तो हैं लेकिन उनकी सोच पार्टी और पार्टी सुप्रीमो से अलग है। यही अलग सोच दोनों के बीच टकराव की वजह बनी है।

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