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कश्मीर में केवल अलगाववादियों के बच्चे पढ़ेंगे, दूसरों के बच्चे पत्थर फेंकेंगे ?

कश्मीर में केवल अलगाववादियों के बच्चे पढ़ेंगे, दूसरों के बच्चे पत्थर फेंकेंगे ?

नई दिल्ली: हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ऐसा लग रहा है जैसे अलगाववादियों के घर का कीमती चिराग बुझ गया। अपने उस बुझे हुए चिराग का बदला लेने के लिए अलगाववादियों ने पूरे कश्मीर में बंद का एलान कर दिया। बाजार बंद हो गए, सड़कें सूनी हो गईं और बच्चों के स्कूलों पर ताला लग गया। जुलाई महीने में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी के सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद हैं।

लेकिन श्रीनगर का एक स्कूल ऐसा है जिसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। और तो और इस स्कूल में इसी महीने परीक्षा भी हुई। जानते हैं क्यों? इसलिए क्योंकि इस स्कूल में अलगाववादी नेता और हुर्रियत के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी की पोती पढ़ती है और परिक्षा देनेवालों में वो भी शामिल हुई। ये स्कूल है श्रीनगर का दिल्ली पब्लिक स्कूल। जहां हाल ही में 9वीं और 10वीं क्लास के इंटरनल एग्जाम हुए।

गिलानी के सबसे बड़े बेटे डॉ. नईम जफर गिलानी की बेटी डीपीएस में 10वीं क्लास में पढ़ती है। हलांकि नईम के परिवार का संबंध तहरीक ए हुर्रियत कश्मीर या हुर्रियत कांफ्रेंस से नहीं है। उनका परिवार श्रीनगर में गिलानी से अलग रहता है। लेकिन परिवार पर गिलानी का प्रभाव जरुर है। जुलाई में घाटी में अशांति की वजह से डीपीएस में टर्म एग्जाम नहीं हो सके। जिसके बाद इसी महीने स्कूल के 573 बच्चे इंटरनल एग्जाम में शामिल हुए। ये परीक्षा शहर के हाई सिक्यॉरिटी जोन सिविल लाइंस के इन्डोर स्टेडियम में हुई। 1-5 अक्टूबर के बीच हुए इस परीक्षा को सही तरीके से कराने में जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी हर तरह की मदद की।

बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से हुर्रियत ने घाटी में बंद का एलान कर रखा है। 112 दिनों से घाटी के सरकारी और दूसरे प्राइवेट स्कूल बंद हैं। जुलाई महीने से अबतक 23 स्कूल जलाए जा चुके हैं। डीपीएस के अलावे दो और स्कूलों को अलगववादियों ने खुलने दिया।

अलगाववादियों के इस दोहरे चरित्र पर विपक्ष ने अलगाववादियों और जम्मू कश्मीर सरकार पर निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा कि अलगाववादी अपने बच्चों का भविष्य संवारना चाहते हैं लेकिन घाटी के दूसरे बच्चों से पत्थर फेंकवाना चाहते हैं। राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जिस तरह से सरकार ने स्टेडियम बुक करवाकर डीपीएस की परीक्षा करवाई वैसी इच्छा शक्ति दूसरे स्कूलों को खुलवाने में क्यों नहीं दिखाई। इससे एक सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या जम्मू-कश्मीर में सरकार अलगाववादियों के दबाव में काम कर रही है। खास बात ये है कि जम्मू कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी की गठबंधन सरकार है।

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