जानिये पीएम मोदी को किसने दी थी 500 और 1000 के नोट बंद करने की सलाह

नई दिल्ली: 8 नवंबर की रात प्रधानमनंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में वो ऐलान कर दिया जिसने उनलोगों की नींद उडा दी थी जो काले नोट की सेज सजाकर सोया करते थे। तब पीएम मोदी ने एलान किया था कि 8 नवंबर को रात के 12 बजे के बाद से 500 और 1000 रुपये के नोट मान्य नहीं होंगे। यानि इस समय सीमा के बाद ये नोट कागज के टुकड़े भर रह जाएंगे।

देश के नाम पीएम मोदी का ये वो संबोधन था जिसने लोगों की आंखों से रातों की नींद गायब कर दी। लोगों ने अपने घरों में रखे 500 और 1000 रुपये के नोट निकलकर उसकी गिनती शुरु कर दी। लेकिन आपको अबतक ये जानकारी नहीं होगी कि आखिर पीएम मोदी को ये सलाह दी किसने।

जानकारी के मुताबिक दरअसल प्रधानमंत्री को ये सलाह देश में आर्थिक-सामाजिक बदलाव को समर्पित थिंक टैंक ‘अर्थक्रांति’ से जुड़े अनिल बोकिल ने काला धन को खत्म करने के लिए कुछ सुझाव दिये थे। इनमें से एक सुझाव बड़े नोटों को बंद करने का भी था। बोकिल ने प्रधानमंत्री से मुलाकत के लिए बस 9 मिनट का वक्त मांगा था। लेकिन जब दोनों की मुलाकात हुई तो तकरीबन ढाई घंटे तक चली।

बोकिल ने इसी मुलाकात में 500, 1000 और 100 रुपये के नोट बंद करने की सलाह दी थी। इस सलाह को देने के पीछे सोच यह थी कि इससे कारोबार बैंकों के जरिये बढ़ेगा साथ इसके कई और फायदे भी थे। सबसे बड़ा फायदा ये था कि इससे देश में छुपाकर रखे गए कालेधन को रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकेगा। क्योंकि जिनलोगों ने कालाधन के रुप में करोड़ों रुपये छुपाकर रखे हैं और काफी कोशिशों के बाद भी उसे बाहर निकालने में कामयाबी नहीं मिली है उनके सामने अपने पैसों को बाहर निकालने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। क्योंकि अगर वो इसके बाद भी अपने छुपाकर रखे गए पैसे बाहर नहीं निकालते हैं तो फिर वो केवल कागज के टुकड़े भर रह जाएंगे।

एक अनुमान के मुताबिक देश में रोजाना 2.7 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन होता है। ये आंकड़ा एक साल में 800 लाख करोड़ रुपये का है। हैरानी की बात ये है कि इसमें से महज 20 फीसदी लेनदेन ही बैंकिंग सिस्टम से होता है। इस बड़े अंतर को कम करने के मकसद से ही सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला लिया।

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