2500 रुपये/घंटा के हवाई सफर में सबसे बड़ा पेंच क्या है ?

2500 रुपये/घंटा के हवाई सफर में सबसे बड़ा पेंच क्या है ?

सरकार ने NEW AVIATION POLICY 2016 का एलान किया। जिसमें अन्य दूसरी बातों के अलावे इस बात का भी जिक्र था कि अब 1 घंटे की उड़ान के लिए मुसाफिरों को मात्र 2500 रुपये जबकि आधे घंटे की उड़ान के लिए 1200 रुपये देने होंगे। सरकार की इस नई नीति से उनलोगों के चेहरों पर भी खुशियां आई जो अक्सर रेल से सफर करते हैं।उन्हें खुशी इस बात की थी कि अब और थोड़ा पैसा खर्च कर वो भी हवाई सफर का मजा ले सकेंगे। लेकिन ये इतना आसान नहीं है।

2500 और 1200 के हवाई सफर में क्या है पेंच?
एक घंटे के लिए 2500 और आधे घंटे के लिए 1200 रुपये के हवाई सफर का नियम उन्हीं एयरपोर्ट पर लागू होंगे जो अभी ऑपरेशनल नहीं हैं। इसका मतलब ये है कि जिन एयरपोर्ट्स से मौजूदा वक्त में हवाई जहाज उड़ान भर रहे हैं वहां ये नियम लागू नहीं होगा। इसका ये मतलब भी है कि छोटे शहरों में बनने वाले एयरपोर्ट्स पर ही 2500 और 1200 रुपये वाला नियम लागू होगा।

देश में इस वक्त कुल 482 एयरपोर्ट हैं जिनमें से केवल 84 ही ऑपरेशनल हैं। सरकार की योजना ये है कि 160 एयरपोर्ट को फिर से चालू किया जाए। जिसमें Scheduled Flights वाले मौजूदा 77 एयरपोर्ट्स की संख्या तीन साल में बढ़ाकर 127 किया जाए। इसलिए सरकार 100 करोड़ तक खर्च कर 80 एयरपोर्ट को इस लायक बनाना चाहती है जहां से हवाई जहाज उड़ान भर सकें और उतर सकें। ये कवायद भारत को एवियेशन सेक्टर में टॉप -10 ग्लोबल लिस्ट में नवें से तीसरे पायदान पर लाने के लिए है।

एक आशंका ये भी जहिर की जा रही है कि सरकार की 2500 और 1200 वाली स्कीम से मेट्रो रुट पर उड़ान भरनेवाले विमानों में किराया महंगा हो सकता है। क्योंकि कंपनियां छोटे शहरों के बीच उड़ान भरने से होने वाले घाटे की भरपाई मेट्रो रुट से करना चाहेगी।

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