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वायु सेना में शामिल हुआ लड़ाकू विमान Tejas

वायु सेना में शामिल हुआ लड़ाकू विमान Tejas

स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। बेंगलुरु में पूरे विधि विधान के साथ Tejas को बेड़े में शामिल किया गया। भारतीय वायुसेना दो तेजस विमानों का स्क्वॉड्रन बनाएगी। तेजस का निर्माण भारतीय एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानि HAL ने किया है। Tejas के निर्माण और भारतीय वायुसेना के बेड़े में इसे शामिल करने में 30 साल का वक्त लग गया।

तेजस से 17 मई को एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने पहली बार उड़न भरी थी। जिसके बाद उन्होंने कहा था कि इस विमान को वायुसेना में शामिल करना अच्छा है। वायुसेना के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 विमान और अगले वित्तीय वर्ष में करीब 8 विमान शामिल करने की योजना है।

स्वदेशी विमान Tejas की क्या है खासियत?
तेजस चीन और पाकिस्तान की तरफ से बनाए गए JF-17 थंडर को टक्कर देनेवाला विमान है। तेजस 6 मानकों पर JF-17 थंडर से बेहतर है। दोनों विमानों की इंजन की क्षमता एक जैसी ही है। लेकिन कई मामलों में तेजस JF-17 थंडर से काफी आगे है। तेजस एक उड़ान में 2300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जबकि JF-17 थंडर 2037 किलोमीटर की दूरी ही तय कर सकता है। तेजस 2500 किलो तेल लेकर उड़ सकता है वहीं JF-17 थंडर 2300 किलो तेल लेकर उड़ सकता है। तेजस में हवा में ही तेल भरा जा सकता है, जबकि JF-17 थंडर में हवा में तेल नहीं भरा जा सकता। तेजस जमीन पर 460 मीटर चलने के बाद ही उड़ सकता है जबकि चीनी विमान को उड़ान भरने से पहले 600 मीटर की दूरी तय करनी होती है।

तेजस 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसके विंग्स 8.2 मीटर चौड़े हैं, लंबाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.4 मीटर है। तेजस का वजन 6560 किलोग्राम है।

क्षमता के मामले में तेजस फ्रांस में निर्मित मिराज 2000 जैसा है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलें और जमीन पर टारगेट को ध्वस्त करने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्नेटर और टारगेटिंग पॉड्स भी हैं।

तेजस ने 2500 घंटे के सफर में 3000 से ज्यादा उड़ानें भरी। इसका परीक्षण करनेवाले सभी पायलट कलाबाजी में इसकी कुशलता और इसके फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम से संतुष्ट हैं।

इसमें सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करने वाले मिशन कंप्यूटर का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ओपन आर्किटेक्चर फ्रेमवर्क को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका मतलब ये है कि इसे भविष्य में अपग्रेड किया जा सकता है।

विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से बना है। जो धातु से कहीं ज्यादा हल्का और मजबूत होता है।

तेजस भारतीय वयुसेना को मिग 21 का विकल्प देगा। भारतीय वायुसेना का मकसद भी यही है।
-Tejas Fighter Plan, Indian Airforce

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