tamilnadu farmer at jantar mantar

दिल्ली के जंतर मंतर पर शनिवार को किसानों ने पिया पेशाब, रविवार को खाएंगे टट्टी

दिल्ली के जंतर मंतर पर शनिवार को किसानों ने पिया पेशाब, रविवार को खाएंगे टट्टी

नई दिल्ली:  दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले 38 दिनों से प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसानों ने शनिवार को अपना ही पेशाब पिया। किसानों ने ऐसा अपनी मांग की तरफ उदासीन सरकार का ध्यान खींचने के लिए किया। किसानों ने पेशाब पीकर अपना विरोध जताया। इससे पहले भी ये किसान अपना विरोध जताने के लिए कई अजीब तरीके अपना चुके हैं।

किसानों ने साफ कर दिया है कि अगर अब भी उनकी मांग नहीं मानी गई तो वो रविवार को मानव मल खाने की हद भी पार कर जाएंगे। तमिलनाडु के किसानों ने इन 38 दिनों के विरोध में कई तरह से अपना विरोध जताया। कभी उन्होंने मानव खोपड़ी के साथ प्रदर्शन किया तो कभी उन्होंने चूहे और सांप को अपने मुंह में दबाकर रखा। किसानों की केंद्र सरकार से मांग है कि उनकी मांग सुनी जाए और उनकी समस्या का समाधान हो।

इंसान का मूत्र पीते हुए कहा कि तमिलनाडु में हमारे पास पीने के लिए पानी नहीं है। केंद्र सरकार से हम पीने के लिए पानी मांग रहे हैं। लेकिन हमारी मांग नहीं सुनी जा रही है। पानी है नहीं इसलिए अब हम अपना मूत्र पी कर प्यास बुझा रहे हैं। क्योंकि इसके अलावा हमारे पास और कोई चारा नहीं है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के किसानों की आत्महत्या को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने भी माना था कि किसानों की हालत बेहद खराब है। कोर्ट के मुताबिक जिस हालात से किसान गुजर रहे हैं उसमें वहां की सरकार की जिम्मेदारी है कि वो अपनी जनता का खयाल रखें। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है।

दिल्ली के जंतर मंतर पर किसानों के इस विरोध प्रदर्शन में कई राजनीतिक दलों के नेता से लेकर अभिनेता तक पहुंच चुके हैं। लेकिन किसानों की समस्या जहां थी वहीं है। केवल उनके विरोध के दिन आगे बढ़ रहे हैं। और उन बढ़ते दिन के बीच किसान विरोध के हर हद को पार करने पार आमदा हैं।

किसानों की क्या है मांग?

तमिलनाडु के किसान भयंकर सूखे का सामना कर रहे हैं। मानसून की बारिश सामान्य से 60 फीसदी कम हुई है। ऊपर से किसानों पर कर्ज की मार पड़ रही है। किसानों का आरोप है कि आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बावजूद सरकार उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। किसान कर्जमाफी के साथ साथ राहत पैकेज की भी मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ मद्रास हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को किसानों का कर्ज माफ करने का निर्देश दिया है।

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