डायबिटीज और कैंसर के बाद अब सेल्फी से मौत !

आज लोगों की चाहत होती है पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर लेने की। अपने हर लम्हे को यादों के सांचे में ढालने की। जहां कुछ अटपटा दिखा नहीं कि उसे कैमरे में कैद कर लिया। इसे ही आम बोलचाल की भाषा में सेल्फी कहते हैं।

आज ऐसे इंसान कम ही मिलेंगे जो इस सेल्फी के बारे में नहीं जानते होंगे। जितने लोग इस सेल्फी के बारे में जानते हैं उतने ही लोगों को सेल्फी लेने की आदत भी पड़ चुकी है। लेकिन लोग जैसे जैसे इस आदत के शिकार हो रहे हैं लोग वैसे वैसे इससे होनेवाले हादसे भी बढ़ रहे हैं।

मौज मस्ती के लिए ली जानेवाली सेल्फी एक पल में सबकुछ पलटकर रख देती है। दोष सेल्फी का नहीं है दोष इंसान का है। जो बगैर इस बात की तसदीक किये कि जिस जगह से वो सेल्फी ले रहे हैं वो पूरी तरह से महफूज है भी या नहीं। बगैर इस बात की पड़ताल किये कि एक सेल्फी कहीं जिंदगी की आखिरी तस्वीर न बन जाए।

आंकड़े के मुताबिक साल 2014 में दुनियाभर में कुल 49 लोगों की मौत सेल्फी लेने की वजह से हुई है। जबकि 2015 में दुनियाभर में 27 लोगों की मौत खतरनाक तरीके से सेल्फी लेने की वजह से हुई। इनमें से 19 लोगों की मौत केवल भारत में हुई है। 2014 में 19 लोगों की मौत ऊंची चट्टान या ऊंची इमारत पर खतरनाक तरीके से सेल्फी लेने की वजह से हुई। जबकि 2014 में 14 लोगों की मौत पानी में सेल्फी लेने की वजह से हुई। इसमें कई लोगों की मौत पानी में डूबने या बह जाने की वजह से हुई। कई की मौत पानी में गिरने के बाद पानी के नीचे किसी पत्थर से टकराने की वजह से हुई। ट्रेन के साथ सेल्फी लेने में 8 लोगों की मौत हुई। खतरनाक तरीके से सेल्फी लेने की वजह से जिनकी मौत हुई है उनकी औसत उम्र 21 साल है। यानि युवा वर्ग को सेल्फी बीमार कर रहा है।

सेल्फी की इस बढ़ती बीमारी को रोकने के लिए मुंबई में 14 नो सेल्फी जोन बनाए गए हैं। नो सेल्फी जोन में सेल्फी लेते पकड़े जाने पर 1200 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। लेकिन अगर सेल्फी से होनेवाली मौत को देखें तो ये जुर्माना काफी कम है। जुर्माने से भी ज्यादा जरुरी ये है कि लोग अपनी जिंदगी की कीमत को समझें। क्योंकि एक सेल्फी के चक्कर में जिंदगी को दांप पर लगा देना कहीं से भी समझदारी नहीं कही जा सकती।
-No Selfie Zone

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