swami-prasad-maurya-join-bjp

स्वामी प्रसाद मौर्य BJP में शामिल, BSP के लिए बनेंगे विभीषण?

स्वामी प्रसाद मौर्य BJP में शामिल, BSP के लिए बनेंगे विभीषण?

दिल्ली: सोमवार को तकरीबन डेढ़ महीने से जारी सस्पेंस और कयास खत्म हो गया। बीएसपी की गली से निकलकर स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी दफ्तर में प्रवेश कर गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य और यूपी बीजेपी के प्रभारी ओम प्रकाश माथुर की मौजूदगी में स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी के नाम का हार अपने गले में धारण कर लिया।

स्वामी प्रसाद मौर्य वो शख्सियत हैं जो मायावती के साथ लंबे वक्त तक जुड़े रहे, पार्टी में महासचिव के पद पर रहे और यूपी विधानसभा में पार्टी ने उन्हें नेता विपक्ष बनाया। इन तमाम ओहदों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वामी केवल नाम के स्वामी नहीं हैं वो बीएसपी के कई गूढ़ रहस्यों के भी स्वामी हैं। अबतक चुनाव में बीएसपी की जो भी रणनीति होती थी उसमें स्वामी प्रसाद मौर्य की भी मौजूदगी होती थी। लेकिन हाल के दिनों में मायावती और मौर्य के रिश्तों में खटास घर कर गई। मौर्य ने पार्टी सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने का आरोप लगा दिया बदले में पार्टी ने मौर्य को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

हलांकी एक सत्य ये है कि बीजेपी में स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री में भी किचकिच काफी हुई। क्योंकि यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य इसके पक्ष में नहीं थे। जबकि यूपी बीजेपी के प्रभारी ओम प्रकाश माथुर स्वामी प्रसाद को बीजेपी में शामिल करने के पक्ष में थे। और ओम माथुर ने ही केंद्रीय नेतृत्व और स्वामी प्रसाद के बीच सेतु का काम किया। इसके पीछे वजह ये थी कि पार्टी को ये आभास हो रहा था कि राज्य की कुर्मी वोट बैंक पर केशव मौर्य से ज्यादा मजबूत पकड़ स्वामी प्रसाद मौर्य की है। यूपी में कुर्मी वोटबैंक तकरीबन 6 फीसदी है। और पूर्वी उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा सीटों पर कुर्मी वोट बैंक का प्रभाव भी है।

बीजेपी खुश इसिलए है क्योंकि उन्हें स्वामी प्रसाद मौर्य विभीषण की भूमिका में मिले हैं। जो अपने पुराने घर के हर कोने से वाकिफ हैं। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य खुश इसलिए हैं कि जब हर तरफ दरवाजे बंद हो गए तो बीजेपी ने अपने छांव तले उन्हें पनाह दे दी। क्योंकि बीएसपी छोड़ने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरएलएसपी और अपनी पार्टी तक बनाने के विकल्प पर उन्होंने विचार किया। लेकिन कहीं मुनाफा होता दिखाई नहीं दे रहा था। कुल मिलाकर बीजेपी में ज्यादा सुकून महसूस कर रहे थे इसलिए सोमवार को अमित शाह के गले मिल गए।

Loading...

Leave a Reply