Swami Prasad Maurya on triple talaq

UP में किसी के साथ जाएंगे या अपनी राह चलेंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?

UP में किसी के साथ जाएंगे या अपनी राह चलेंगे स्वामी प्रसाद मौर्य ?

स्वामी प्रसाद मौर्य को BSP छोड़े गिनती के दिन हुए हैं। लेकिन इन चंद दिनों में इस बात पर हजारों सवाल हो चुके हैं कि बहन जी को अलविदा कहने के बाद स्वामी के लिए किसके दरवाजे पर स्वागत की तख्ती लटकेगी। गुरुवार 23 जून को यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य की तारीफ कर ये संकेत दे दिये थे कि मौर्य का अगला ठिकाना समाजवादी पार्टी हो सकती है। हलांकी स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए समाजवादी पार्टी नई नहीं है क्योंकि समाजवाद के साइकिल से उतर कर ही मौर्य ने हाथी की सवारी की थी। लेकिन अब हाथी की पीठ से नीचे उतर चुके हैं। क्योंकि वहां हाथी की ऊंचाई ज्यादा थी और मौर्य का कद छोटा हो रहा था।

  • UP वाले स्वामी किसका स्वामित्व स्वीकार करेंगे ?

जिस वक्त मौर्य ने BSP का साथ छोड़ा तभी से ये कयास लगाए जाने लगे थे कि वो समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। अखिलेश की तरफ से की गई तारीफ ने इस कयास को ताकत दी। लेकिन जब मौर्य ने ये कह दिया कि समाजवादी पार्टी गुंडों की पार्टी है तो उनके सपा में जाने की उम्मीद धुंधली होने लगी। हलांकि सियासत में दिया गया बयान कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है। समय और परिस्थिति के हिसाब से बयान देने वाले अपने पुराने वाक्यों का भावार्थ बदलते रहे हैं। ऐसा कई बार हो चुका है। अगर इसबार भी हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं। लेकिन अभी जो हालात बन रहे हैं मौर्य को लेकर उसमे तो यही लग रहा है कि मौर्य समाजवादी पार्टी के स्वामित्व के अधीन खुद को सेवक के रूप में स्थापित नहीं करना चाहते।

एक दूसरा दरबार बीजेपी का भी है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बीजेपी अपने दरवाजे पर स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम से स्वागत की तख्ती लटका दे। हलांकि मौर्य के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी के भीतर कुछ देर के लिए असंतुलन की स्थिति तो जरुर बनेगी। लेकिन भविष्य में मतलब विधान सभा चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिल सकता है। क्योंकि अभी तक मौर्य के BSP छोड़ने का आफ्टर शॉक सामने नहीं आया है। कहने का मतलब है कि ऐसा नहीं है कि मौर्य ने अकेले पार्टी छोड़ी है। BSP के भीतर हलचल मची है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि दूसरे विधायक मौर्य की तरफ से ईशारा होने का इंतजार कर रहे हों। लेकिन औरों को अपने साथ लाने से पहले मौर्य एक निश्चित ठिकाने की तलाश में हैं।

मौर्य के निश्चित ठिकाने तीन दिशाओं की तरफ इशारा करते हैं। एक समाजवादी पार्टी, दूसरी बीजेपी और तीसरा खुद उनका अपना तंबू। यानि उनकी अपनी पार्टी। मौर्य के सामने एक विकल्प खुद अपनी पार्टी बनाने की भी है। BSP में रुठों की कमी नहीं होगी। उन रुठों को भी एक नए ठिकाने की तलाश होगी। स्वामी प्रसाद मौर्य नया तंबू ठिकाना बना रहे हैं। उनके ठिकाने में बीएसपी के नाराज भी पनाह मांगने की तैयारी में हैं। इस हालत में मायावती के लिए चुनौती बड़ी हो गई है। मौर्य की विदाई के बाद आफ्टर शॉक से पुराने वफादारों को साथ मिलाकर रखना है साथ ही बाहर हो चुके मौर्य की सेंधमारी से पार्टी के किले को भी महफूज रखना है।

-Swami Prasad Maurya, Chief Minister Akhilesh Yadav, Samajwadi Party, Mayawati

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