अजमेर ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद समेत पांच बरी




नई दिल्ली: अजमेर ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद समेत पांच आरोपियों को एनआईए की जयपुर कोर्ट न बरी कर दिया है। इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी पाया गया है। फैसला सुनाते हुए एनआईए ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। जबकि 2011 में इसी जांच एजेंसी ने असीमानंद को 2007 में हुए अजमेर ब्लास्ट का मास्टरमाइंड बताया था।

अजमेर में सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर 11 अक्टूबर 2007 को तकरीबन शाम के 6 बजे विस्फोट हुआ था। इस बम धमाके में तीन लोग मारे गए थे। जबकि 30 घायल हुए थे। इस मामले की जांच राजस्थान एटीएस ने शुरु की थी। 20 अक्टूबर को 2010 को अजमेर के सीजेएम कोर्ट में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। जिसके बाद 1 अप्रैल 2011 को मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई।

एनआईए की तरफ से इस केस मे 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया था। उनमें से सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। तीन अभी भी फरार हैं। स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, लोकेश शर्मा, मुकेश वासानी,हर्षद, भारत मोहनलाल रतिश्वर, संदीप डांगे, रामचंद्र, भावेश भाई पटेल, सुरेश नायर और मेहुल को आरोपी बनाया गया।

एनआईए के चार्जशीट में कहा गया कि आरएसएस से जुड़े कुछ हिंदू चरमपंथियों ने वारदात को अंजाम दिया। असीमानंद और दूसरे आरोपियों का नाम सामने आने के बाद तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था।जिसके बाद उनकी काफी किरकिरी भी हुई थी।

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