2012 के समझौते पर कायम, कूटनीति से डोकलाम विवाद सुलझाएंगे-सुषमा स्वराज

नई दिल्ली:  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने डोकलाम पर अपना रुख साफ करते हुए राज्य सभा में कहा कि इस विवाद को भारत,चीन और भूटान मिलकर सुलझाएंगे। उन्होंने कहा हम आज भी 2012 के समझौते पर कायम हैं। और उसी के तहत विवाद का निपटारा भी होगा। उन्होंने कहा डोकलाम में चीन की मौजूदगी एक खतरा है। सुषमा स्वराज ने कहा युद्ध किसी विवाद या समस्या का समाधान नहीं है। युद्ध के बाद भी बातचीत के लिए टेबल पर बैठते हैं। इसलिए हम चाहते हैं बातचीत से डोकलाम का समाधान निकले।

पाकिस्तान पर सुषमा स्वराज ने कहा जिस दिन पाकिस्तान आतंकवाद फैलाना बंद कर देगा उसी दिन उसके साथ बात होगी। सुषमा स्वराज विपक्षी नेताओं के चीनी नेताओं से मिलने पर भी बरसीं। उन्होंने कहा विपक्ष के नेता चीनी राजदूत से क्यों मिले। विपक्ष के नेता को पहले भारत का पक्ष जानना चाहिए था। हमने डोकलाम विवाद पर सबको जानकारी दी। अब युद्ध लड़ने का युग बदल गया है।

विदेश मंत्री ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि आज विदेश नीति एमईए में तय की जाती है। सुषमा स्वराज ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से पूछा मनमोहन सिंह जी आप बताइये जब आप विदेश दौरे पर जाते थे तो कई बार आप एस एम कृष्णा को साथ ले जाते थे। सुषमा स्वराज विपक्ष के उस सवाल का जवाब दे रही थीं जिसमें विपक्ष की तरफ से पूछा गया था कि विदेश नीति विदेश मंत्रालय में नहीं बल्कि खुद पीएम तय करते हैं। सुषमा ने कहा विदेश मंत्री का दौरा अलग होता है और प्रधानमंत्री का दौरा अलग होता है।

सुषमा स्वराज ने कहा विपक्ष कहता है भारत अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अकेले पड़ गया है। लेकिन वो बताएं क्या ये सच है। उन्होंने कहा जर्मनी, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन हमारे साथ हैं। हम रमुआ नहीं हैं। जैसा शरद यादव जी ने कहा था। उन्होंने कहा पेरिस एग्रीमेंट पर ट्रंप के बयान पर मोदी ने कहा था हम पांच हजार साल पुराने देश हैं। संसदीय मर्यादा का पालन करें। ट्रंप जो बोले वो तो याद रखते हैं लेकिन मोदी जो बोलते हैं वो याद नहीं रखते।

सुषमा ने कहा आज भारत एजेंडा तय कर रहा है। उन्होंने कहा पीएम मोदी में वो माद्दा है कि वो ट्रंप को जवाब देकर आए हैं।

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